रायपुर:





सुबह का सूरज आज बादलो में कही गुम था…रात बारिश हुई थी और भीगी-भीगी मौसम के बीच हजारों लोगों का हुजूम जिस ओर आकर्षित हो रही थीं… वह शायद उनकी श्रद्धा और विश्वास ही था…जो इस धरती के ऐसे राम को देखने आए जा रहे थे… जो किसी मंदिर में नहीं… अपितु इनके जीवन में सदैव समाहित है। बेशक यह रामनामी है और न सिर्फ इनका चोला..शरीर का हर हिस्सा राम…राम…राम…के अक्षरों से नस-नस में विद्यमान है।
शरीर पर श्वेत परिधानों के साथ मोह, माया, लोभ, काम, क्रोध और व्यसनों को त्याग कर सबको भाई-चारे के साथ बिना किसी भेदभाव के शांतिपूर्ण तरीके से जीवनयापन का संदेश भी देते हैं।









