अंबिकापुर: सरगुजा जिले के उदयपुर प्रखण्ड में क्षेत्र के सेंकड़ों ग्रामीणों का एक समूह गुरुवार परसा ईस्ट केते बासेन (पीईकेबी) खदान शुरू करवाने की मांग लो लेकर अंबिकापुर जिला मुख्यालय में कलेक्टर विलास भोसकर संदीपन से मिला। ग्राम साल्ही, परसा, बासन, शिवनगर, फतेहपुर, घाटबर्रा इत्यादि गांवों के ग्रामीणों के समूह ने बीते छः महीने से बंद पड़ी खदान परसा ईस्ट केते बासेन (पीईकेबी) खदान को पुनः सुचारु रूप से चलाने की मांग हेतु नवपदस्थ कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।
ग्रामीणों ने संदीपन को मुलाकात के दौरान बताया कि,“हम आवेदकगण खदान प्रभावित परिवार के सदस्य व आसपास के ग्रामीण हैं तथा अधिकतर लोग खदान में नौकरी करके अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। लेकिन उनके क्षेत्र की एक मात्र खदान कई महीनों से जमीन नहीं उपलब्ध होने के कारण अब बंद हो गई है जिससे उन्हें बेरोजगार होकर अब रोजी-रोटी के लिए भटकना पड़ रहा है।“ ग्रामीणों ने श्री संदीपन से यह भी दरख्वास्त की है कि रायपुर स्थित एनजीओ निजी स्वार्थ के लिए आदिवासियों के हित धारक होने का ढोंग करते हुए पीईकेबी खदान और पिछड़े हुए सुरगुजा जिले के विकास का राजनीतिकरण कर रहे हैं जिनको रोकना चाहिए ।
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने राजस्थान सरकार को 2007 में पीईकेबी खदान का आवंटन किया था जो कि 2012 से कार्यरत है और छत्तीसगढ़ के राजस्व मे सालाना एक हजार करोड़ के राजस्व देने के साथ-साथ हसदेव में सुरगुजा जिले में 5000 लोगों को प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रुप से रोजगार देता है । राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (RRVUNL) को आवंटित कोयला ब्लॉक परियोजना के बंद होने से स्थानीय लोगों, विशेष रूप से आदिवासियों, को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। इस खदान से खदान प्रभावित परिवारों के अलावा आसपास के स्थानीय लोगों को रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क, बिजली, आदि जैसी मूलभूत सुविधाएं प्राप्त हो रही हैं। खदान के बंद होने से इन लोगों के जीवन पर विपरीत प्रभाव पड़ा है।








