
रायपुर:प्राकृतिक सौंदर्य और वनौषधीय संपदा के लिए अपनी अलग पहचान रखने वाले गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की वादियों में इन दिनों एक नई खुशबू फैल रही है। यह खुशबू केवल लेमन ग्रास की नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, समृद्धि और महिला सशक्तिकरण की है। कभी परिवार की सीमित आय में घर-गृहस्थी संभालने वाली ग्रामीण महिलाएं आज संगठित होकर खेती और स्वरोजगार के माध्यम से अपने परिवार की आर्थिक ताकत बन रही हैं। ग्राम अमारू में बिहान योजना से जुड़ी महिला स्वसहायता समूहों की दीदियों ने लेमन ग्रास की खेती के जरिए ‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में एक नई शुरुआत की है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर ‘लखपति दीदी’ के रूप में आगे बढ़ाने की परिकल्पना को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार जमीनी स्तर पर साकार करने की दिशा में लगातार काम कर रही है। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के समन्वय से महिलाओं को स्वसहायता समूहों से जोड़ने के साथ उन्हें आर्थिक सहायता, बैंक लिंकेज, प्रशिक्षण और आजीविका के नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसी कड़ी में जीपीएम जिले में लेमन ग्रास जैसी औषधीय और व्यावसायिक फसलों को ग्रामीण महिलाओं की आय का नया माध्यम बनाने की पहल की गई है।









