
Oplus_131072
रायपुर:राजधानी के श्री शंकराचार्य आश्रम में चल रहे चातुर्मास प्रवचन माला के क्रम को गति देते हुए गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती के उपलक्ष्य पर शंकराचार्य आश्रम के प्रमुख डॉ. इन्दुभवानन्द तीर्थ महाराज ने बताया कि गोस्वामी तुलसीदास जी साक्षात् वाल्मीकि के अवतार हैं। आयोजित सभा को गति देते हुए महाराज श्री ने बताया कि भगवान श्री राम ने लीला का संवरण ही नहीं किया था कि वाल्मीकि जी ने उनके ही पुत्र लव कुश के द्वारा भगवान श्री राम की कीर्ति का गायन कर सुना दिया! भगवान राम से यह कीर्ति गायन (रामायण) प्रमाणित भी हो गया तथा हनुमान जी को यह अत्यंत प्रिय लगा। हनुमान जी ने विचार किया कि यह काव्य संगीत अमर रहे ?किंतु यह संस्कृत वाणी में है आगे चलकर साधारण लोग जब संस्कृत से अनभिज्ञ हो जाएंगे तब इसके रस का आस्वादन कैसे ले सकते हैं, उन्हें इस बात की चिंता हो गई।
उन्होंने कहा श्री हनुमान जी ने वाल्मीकि महामुनि की योग्यता उनका अधिकार हर तरह से निरख लिया,परख लिया अंत में उन्होंने उनसे कहा कि तुम्हारे ह्रदय में भगवान रामके प्रति प्रेम है तुम्हें संसार का कोई भय नहीं है एक बार तुम कलयुग में पैदा होना उस समय भी भगवान राम के गुण और लीलाओं को सर्वसाधारण के लिए सुलभ करा देना मैं तुम्हारी रक्षा करूंगा। श्री वाल्मीकि ने उनकी आज्ञा स्वीकार की उन्होंने कलयुग में जन्म लेकर रामलीला का मधुर संगीत गायन करने का वचन दिया।वे ही वाल्मीकि जी गोस्वामी तुलसीदास जी के रूप में अवतरित हुए और रामचरितमानस नामक अमूल्य ग्रंथ सनातन समाज को प्रदान किया। सनातन समाज गोस्वामी तुलसीदास जी का ऋणी है। श्री रामचरितमानस समस्त शास्त्रों का निचोड़ है एक ही ग्रंथ में समस्त शास्त्रों का सार स्थापित करके गोस्वामी तुलसीदास जी ने सनातन धर्म को समृद्ध और सुदृढ बनाया है। आज सनातन धर्म की रक्षा के लिए रामचरितमानस नींव का पत्थर सिद्ध हो रहा है।
कथा के पूर्व समस्त भक्तों ने गोस्वामी तुलसीदास जी के पहले चित्र का पूजन कर माल्यार्पण किया तथा संस्कृत विद्यालय के छात्रों ने वेद पाठ किया।









