
रायपुर:राजधानी स्थित माँ गोदावरी आनंदवन आश्रम में स्वतंत्रता दिवस का पर्व पूरे उत्साह, उमंग और देशभक्ति की भावना के साथ मनाया गया।
आश्रम ट्रस्ट के योगेश तिवारी के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में आश्रम परिवार के सभी सदस्यों ने एक साथ शामिल होकर राष्ट्रीय पर्व को गरिमापूर्ण एवं आत्मीय वातावरण में मनाया। कार्यक्रम की सबसे खास बात यह रही कि आश्रम के सबसे बुजुर्ग के हाथों राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया गया। जैसे ही तिरंगा आसमान में लहराया, पूरा वातावरण राष्ट्रप्रेम और गौरव की भावना से भर गया। उपस्थित सभी लोगों ने तिरंगे को सलामी दी और देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीर शहीदों एवं स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आश्रम में सभी बुजुर्ग माता-पिता एवं आश्रम परिवार के सदस्यों ने एक साथ मिलकर 15 अगस्त का पर्व मनाया। कार्यक्रम के दौरान देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति हुई, वहीं आश्रम के सदस्यों ने अपनी पसंद के गीत भी गाकर वातावरण को खुशनुमा बनाया। बुजुर्गों ने पूरे उत्साह के साथ कार्यक्रम में सहभागिता की और अपने जीवन के अनुभवों एवं भावनाओं को भी साझा किया। इस अवसर पर योगेश तिवारी ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल एक राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि यह हमें त्याग, संघर्ष और बलिदान की उस महान यात्रा की याद दिलाता है, जिसके कारण आज हमारा देश स्वतंत्र है। उन्होंने कहा कि आश्रम में रहने वाले बुजुर्ग हमारे लिए अनुभव और संस्कार की धरोहर हैं। उनके साथ राष्ट्रीय पर्व मनाना अपने आप में बेहद भावुक और गौरवपूर्ण अनुभव है। उन्होंने कहा कि माँ गोदावरी आनंदवन आश्रम का उद्देश्य केवल बुजुर्गों को रहने की जगह उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उन्हें परिवार जैसा अपनापन, सम्मान और खुशियों भरा वातावरण देना है। यहां सभी लोग एक-दूसरे के साथ मिलकर त्योहार और विशेष अवसर मनाते हैं, ताकि किसी भी बुजुर्ग को अकेलेपन का एहसास न हो। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आश्रम परिसर में आपसी प्रेम, सम्मान और भाईचारे का सुंदर वातावरण देखने को मिला। बुजुर्ग माता-पिता ने देशभक्ति गीतों के साथ अपनी खुशियां साझा कीं और पूरे उत्साह के साथ राष्ट्रीय पर्व का आनंद लिया। माँ गोदावरी आनंदवन आश्रम, गोमची में मनाया गया यह स्वतंत्रता दिवस समारोह राष्ट्रप्रेम के साथ-साथ बुजुर्गों के सम्मान, अपनत्व और पारिवारिक भावनाओं का सुंदर संदेश देकर संपन्न हुआ।










