
बिलासपुर/रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार की हालिया पुलिस ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर उठ रहे विवाद के बीच हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश दिया है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) ऋचा मिश्रा की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने उनके संबंध में जारी 20 जुलाई 2026 के तबादला आदेश के प्रभाव और संचालन पर रोक लगा दी है। अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि याचिकाकर्ता ने अंतरिम राहत पाने के लिए पर्याप्त आधार प्रस्तुत किया है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि अतिरिक्त पुलिस अधीक्षकों की ग्रेडेशन सूची में ऋचा मिश्रा का नाम क्रमांक 35 पर है, जबकि उनसे कनिष्ठ अधिकारियों को कमांडेंट और पुलिस अधीक्षक (एसपी) जैसे उच्च पदों पर पदस्थ किया गया है। वहीं उन्हें डिप्टी कमांडेंट के पद पर भेजा गया है। याचिका में इसे वरिष्ठता के सिद्धांत के विपरीत बताया गया।
याचिका में 14 जुलाई 2014 के राज्य शासन के उस परिपत्र का भी उल्लेख किया गया जिसमें स्पष्ट निर्देश है कि किसी वरिष्ठ अधिकारी की उपेक्षा कर कनिष्ठ अधिकारी को उच्च पद का प्रभार नहीं दिया जाएगा। याचिकाकर्ता का कहना है कि 20 जुलाई 2026 का पदस्थापना आदेश इसके विपरीत है।
राज्य शासन की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा गया, जिसके बाद हाईकोर्ट ने राज्य सहित अन्य पक्षकारों को नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर 2026 को निर्धारित की है।
इस घटनाक्रम ने राज्य सरकार की हालिया ट्रांसफर-पोस्टिंग पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस की तबादला सूची को लेकर पहले से ही पुलिस महकमे और राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं चल रही हैं। जानकारों का दावा है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौरान दुर्ग जिले में पदस्थ रहे कई अधिकारियों को एक बार फिर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। यह भी कहा जा रहा है कि महादेव सट्टा एप प्रकरण के दौरान विवादों में रहे अधिकारियों को अहम पदों पर पुनः तैनाती मिली है। हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद अब यह मामला केवल एक अधिकारी के तबादले तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पुलिस विभाग में वरिष्ठता, पदस्थापना की पारदर्शिता और शासन की स्थानांतरण नीति के पालन को लेकर भी बहस तेज होने की संभावना है। अब सबकी निगाहें 23 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस मामले में आगे की न्यायिक दिशा स्पष्ट होगी।






