
रायपुर:रात 12 बजे के बाद बारिश शुरू हुई और सुबह होती रही। यह कोई पहली बारिश नहीं थी। रायपुर ने इससे कहीं लंबी झड़ियां देखी हैं, कई-कई दिनों तक मूसलाधार वर्षा भी झेली है। लेकिन कुछ ही घंटों की बारिश में पूरा शहर तालाब बन जाए, सड़कें नदी बन जाएं और घरों में पानी घुस जाए—यह स्थिति सामान्य नहीं, बल्कि नाकामी का प्रमाण है। इसके लिए जितने जिम्मेदार प्रशासनिक व्यवस्था है उतने ही जिम्मेदार हम सब भी हैं ?
सवाल यह है कि आखिर पानी जाए कहां? जवाब भी सबको पता है। शहर की नालियां, नाले, तालाब और प्राकृतिक जल निकासी के रास्ते प्लास्टिक, डिस्पोज़ल, कुरकुरे-चिप्स के पैकेट, पान मसाले की पुड़ियां, मैगी की रैपर और थर्मोकोल के कचरे से पटे पड़े हैं। जिस रास्ते से पानी निकलना चाहिए, वही रास्ता को आपने और हमने सबने बंद कर दिया। लोगों को लगता है झिल्ली तो है क्या होगा पर फिर पानी सड़कों और घरों में नहीं जाएगा तो कहां जाएगा?
दूसरी बड़ी विडंबना है विकास के नाम पर बार-बार , जितने बार टूटेगी, खोदेगी उतने बार बनने वाली सड़कें। बार बार बनकर सड़कें ऊंची होती जा रही हैं, सीसी रोड पर सीसी रोड चढ़ती जा रही है, लेकिन लोगों के घर वहीं के वहीं रह गए। लोगों के घेरे में दो-दो तीन-तीन सीढ़िया होती थी आज सब सीढ़ियां दब गई है , नतीजा यह है कि आज सड़कें घरों से ऊंची और घर आंगन गड्ढों में बदल गए हैं। बारिश का पानी सीधे लोगों के आंगन और कमरों में घुस रहा है। सरकार तो हर साल करोड़ों रुपये खर्च कर सड़क दोबारा बना सकती है, लेकिन क्या आम आदमी हर दो-तीन साल में अपना घर ऊंचा कर सकता है?
एक समय था जब बरसात से विशेष सफाई अभियान चलाता था। नालों की सिल्ट निकाली जाती थी,नालों की जमीन दिखाती थी, नालियों की सफाई होती थी, जल निकासी के रास्तों से अतिक्रमण हटाया जाता था ताकि बारिश का पानी बिना रुके निकल सके। और आज जमीनी हकीकत यह है कि पहली तेज बारिश ने ही पूरे शहर की पोल खोल दी है।
आज रायपुर की सड़कें नहीं, जलभराव के नक्शे दिखाई दे रहे हैं। कहीं वाहन डूब रहे हैं, कहीं लोग घरों में कैद हैं, कहीं दुकानों में पानी भर गया है। यह प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि लापरवाही, अव्यवस्थित योजना और अनदेखी का परिणाम है। क्योंकि लोगों को घर के सामने नाला नहीं चाहिए बहुत सारे जगह पर जहा आज पानी भरा है वहां समय-समय पर अनेक मदों से पानी निकासी हेतु बड़े नाले बनाने का काम स्वीकृत हुआ था पर जिसके घर के सामने नाला बनाना था उन लोगों ने विरोध किया कि हमारे घर के सामने नाला नहीं बनाना चाहिए रोड की चौड़ाई कम हो जाएगी गाड़ियां रखते नहीं बनेगी आखिर पानी आसमान से तो नहीं बहेगा और विवाद के चलते कई जगहों पर काम नहीं हुआ नाले नहीं बने कुछ कब्जा मुक्त कर नाला बनाना था पर कब्जा हटाने में स्थानीय राजनीति सक्रिय रही ।
यदि अब भी शहर के नालों, तालाबों और जल निकासी तंत्र को नहीं बचाया गया, यदि कचरे के प्रबंधन और नालों जल बहाव के श्रोतों के अतिक्रमण पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई, यदि सड़क निर्माण में वैज्ञानिक मानकों का पालन नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में हर बारिश रायपुर के लिए बाढ़ का दूसरा नाम बन जाएगी।
बारिश को दोष देना आसान है, लेकिन सच यह है कि पानी ने अपना रास्ता नहीं बदला, हमने उसका रास्ता बंद कर दिया। आज रायपुर पानी में नहीं डूबा है, बल्कि अव्यवस्थित विकास की कीमत चुका रहा है।
( मनोज शुक्ला)










