
रायपुर:आल इंडिया इंश्योरेंस एम्पलाईज एसोसिएशन (AIIEA) ने भारत सरकार द्वारा GIC Re में अतिरिक्त 5% हिस्सेदारी को ऑफर फॉर सेल (OFS) के माध्यम से बेचने के निर्णय की कड़े शब्दों में निंदा की है। इस बिक्री में 2% आधार (Base Offer) तथा 3% ग्रीन-शू विकल्प (Green Shoe Option) शामिल है।
AIIEA के अध्यक्ष धर्मराज महापात्र एवं महासचिव श्रीकांत मिश्रा ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि भारत सरकार द्वारा यह बिक्री वर्ष 2017 में 14.22% हिस्सेदारी के विनिवेश तथा सितंबर 2024 में 3.4% हिस्सेदारी की बिक्री के अतिरिक्त है। इसके परिणामस्वरूप राष्ट्रीय पुनर्बीमा कंपनी (GIC Re) में सरकार की हिस्सेदारी घटकर 77.4% रह जाएगी। AIIEA का मानना है कि यह कदम अत्यंत चिंताजनक है और देश के दीर्घकालिक हितों के विरुद्ध है।
GIC Re केवल एक और सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम नहीं है, बल्कि यह भारत की राष्ट्रीय पुनर्बीमा (National Reinsurance) कंपनी है। यह संस्था देश के बीमा क्षेत्र को मजबूत बनाने तथा राष्ट्रीय आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में अत्यंत महत्वपूर्ण और रणनीतिक भूमिका निभाती है। ऐसी महत्वपूर्ण संस्था में सरकार के स्वामित्व को कमजोर करना सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। लाभ कमाने वाली तथा रणनीतिक महत्व की सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं, विशेषकर GIC Re, में बार-बार सरकारी हिस्सेदारी कम करना एक अत्यंत चिंताजनक नीतिगत दिशा को दर्शाता है।
AIIEA ने कहा कि सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए 80,000 करोड़ रुपये के विनिवेश लक्ष्य को प्राप्त करने का उद्देश्य देश के दीर्घकालिक हितों की बलि देकर उचित नहीं ठहराया जा सकता। GIC Re जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाएँ दशकों की सार्वजनिक आस्था, पेशेवर उत्कृष्टता और राष्ट्र के प्रति समर्पण के आधार पर निर्मित हुई हैं। इन्हें अल्पकालिक राजस्व प्राप्ति का साधन नहीं बनाया जाना चाहिए।




