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पोखरा (नेपाल):संस्कृत विश्वविद्यालय, काठमांडू (नेपाल), पंजाबी सभा मॉस्को (रूस) तथा विद्या विकास मंडल कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, अक्कलकुवा (महाराष्ट्र, भारत) के संयुक्त तत्वावधान में 12–13 जून 2026 को पोखरा, नेपाल में आयोजित द्वि-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह में पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के प्रो. राजीव चौधरी ने अतिथि वक्ता के रूप में अपना विशिष्ट व्याख्यान प्रस्तुत किया।
अपने व्याख्यान “वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारतीय ज्ञान परंपरा, शिक्षा, अनुसंधान एवं योग का योगदान” विषय पर बोलते हुए प्रो. चौधरी ने कहा कि भारत की प्राचीन शिक्षा व्यवस्था विश्व की सर्वाधिक समृद्ध एवं वैज्ञानिक शिक्षा परंपराओं में से एक रही है। उन्होंने मगध एवं मौर्य काल की ज्ञान-संपन्न परंपराओं, तक्षशिला एवं नालंदा जैसे विश्वविख्यात शिक्षा केंद्रों का उल्लेख करते हुए बताया कि भारतीय शिक्षा प्रणाली केवल ज्ञानार्जन तक सीमित नहीं थी, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, नैतिक मूल्यों, सामाजिक उत्तरदायित्व तथा जीवनोपयोगी कौशलों के विकास पर भी आधारित थी।
उन्होंने वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में ज्ञान-आधारित समाज के निर्माण हेतु उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति उसके अनुसंधान की गुणवत्ता, नवाचार क्षमता तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर निर्भर करती है। शोध कार्यों में मौलिकता, नैतिकता, वैज्ञानिक पद्धति तथा समाजोपयोगिता को अपनाकर ही स्थायी विकास के लक्ष्य प्राप्त किए जा सकते हैं।
प्रो. चौधरी ने भारतीय ज्ञान प्रणाली (Indian Knowledge System) को मानव सभ्यता की अमूल्य धरोहर बताते हुए कहा कि भारतीय चिंतन परंपरा ने दर्शन, गणित, चिकित्सा, खगोल विज्ञान, पर्यावरण संरक्षण, जीवन प्रबंधन तथा आध्यात्मिक उन्नयन जैसे विविध क्षेत्रों में विश्व को महत्वपूर्ण योगदान प्रदान किया है। आज आवश्यकता है कि इस ज्ञान को आधुनिक संदर्भों के साथ जोड़कर वैश्विक स्तर पर पुनः स्थापित किया जाए।
अपने व्याख्यान के दौरान उन्होंने योग के बहुआयामी महत्व पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के समन्वित विकास की एक वैज्ञानिक जीवन-पद्धति है। योग व्यक्ति को शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन, भावनात्मक स्थिरता तथा आध्यात्मिक चेतना प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि नियमित योगाभ्यास से कार्यक्षमता, एकाग्रता, सकारात्मक सोच तथा जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।
प्रो. चौधरी ने योग की आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक उपयोगिता का उल्लेख करते हुए कहा कि योग मनुष्य के भीतर निहित आस्था, आत्मविश्वास, इच्छाशक्ति तथा आत्मानुशासन का विकास करता है। योग व्यक्ति को तनाव, चिंता तथा आधुनिक जीवनशैली से उत्पन्न विभिन्न समस्याओं से मुक्ति दिलाने में प्रभावी भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि योग की सार्वभौमिक स्वीकार्यता इस तथ्य का प्रमाण है कि भारतीय ज्ञान परंपरा आज भी संपूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर रही है।
इस अवसर पर प्रो. राजीव चौधरी को उनके शैक्षणिक एवं शोध योगदान हेतु “लोक चेतना सम्मान–2026” से सम्मानित भी किया गया।यह संगोष्ठी वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भाषा, साहित्य, संस्कृति, जनजातीय अध्ययन, पर्यावरण, व्यवसाय तथा सामाजिक अस्मिता जैसे विविध विषयों पर विचार-विमर्श का महत्वपूर्ण मंच सिद्ध हुई।









