
रायपुर:छत्तीसगढ़ का गरियाबंद जिला केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि प्रकृति, आध्यात्मिकता और रोमांच का जीवंत अनुभव है। यहां की हरियाली, झरनों की गूंज, मंदिरों की आस्था और जंगलों की शांति पर्यटकों को एक अलग ही दुनिया में ले जाती है। जिले के ग्राम मरोदा के पास स्थित भूतेश्वरनाथ महादेव मंदिर एक प्राकृतिक शिवलिंग है, जिसके बारे में मान्यता है कि यह शिवलिंग हर वर्ष स्वतः बढ़ता जाता है। सावन और महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां हजारों श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। घने जंगलों के बीच स्थित यह स्थल अद्भुत आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है और यहां पहुंचते ही मन स्वतः ही शांत हो जाता है।
गरियाबंद का जतमई और घटारानी क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य का अनमोल खजाना है। रायपुर से लगभग 80-90 किलोमीटर दूर स्थित यह क्षेत्र विशेषकर वर्षा ऋतु में अपनी पूरी भव्यता के साथ नजर आता है। बारिश के समय यहां के झरने ऊंची चट्टानों से पूरी शक्ति के साथ गिरते हैं, जिससे चारों ओर पानी की फुहार और हल्की धुंध-सा वातावरण बन जाता है। घनी हरियाली से आच्छादित यह क्षेत्र ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रकृति ने स्वयं इसे सजाया हो। ठंडी हवाएं और झरनों की निरंतर गूंज मन को गहरे सुकून का एहसास कराती है।
जतमई या घटारानी पहुंचते ही झरनों की तेज आवाज सुनाई देती है, जो पर्यटकों का स्वागत करती है। ऊंचाई से गिरता पानी, चट्टानों पर बहती धाराएं और आसपास खड़े विशाल वृक्ष एक जीवंत दृश्य प्रस्तुत करते हैं। लोग यहां चट्टानों पर बैठकर इस प्राकृतिक सौंदर्य को निहारते हैं, वहीं कई पर्यटक झरनों के पास जाकर ठंडे पानी की फुहार का आनंद लेते हैं। घटारानी मंदिर के समीप बहता झरना विशेष आकर्षण का केंद्र है, जहां पानी कई स्तरों में गिरता हुआ अद्भुत दृश्य बनाता है, जबकि जतमई माता मंदिर के आसपास धार्मिक आस्था और प्राकृतिक सुंदरता का अनूठा संगम देखने को मिलता है।










