
रायपुर:शिक्षा का अधिकार कानून की व्याख्या करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने आज सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया है की कानून निर्माताओं की मंशा इस कानून के दायरे में सिर्फ कक्षा एक से स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए सीमित रखने का नहीं है अपितु जहां से बच्चों की
औपचारिक शिक्षा का प्रारंभ होता है, कानून का दायरा वहां तक है, अर्थात प्री प्राइमरी,नर्सरी स्कूल भी इस दायरे में आएंगे।हाई कोर्ट ने राज्य में चल रहे ग़ैर मान्यता प्राप्त तथा अवैध प्ले स्कूल नर्सरी स्कूलों पर चिंता व्यक्त करते हुए राज्य शासन को उनकी मान्यता एवं संचालन के लिए जल्द से जल्द स्पष्ट नियम बनाने के कड़े निर्देश दिए।
वंचित,शोषित ग़रीब छात्रों निःशुल्क शिक्षा के अधिकार के लिए संघर्षरत विकास तिवारी ने माननीय उच्च न्यायालय का ध्यान प्री प्राइमरी अवैध स्कूलों में बच्चों के साथ हो रही ज्यादतीयों तथा उनके विरुद्ध शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं होने पर दिलाया। उन्होंने रायपुर स्थित बिना मान्यता के केपीएस किड्स स्कूल में छात्रा को अगरबत्ती से जलाने का मामला उठाया जिसके बाद छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने इस संबंध में शिक्षा सचिव को शपथ पत्र दाखिल करने को कहा है।
शिक्षा विभाग के दस्तावेज जलने का मुद्दा भी उठा:
विकास तिवारी ने विगत दिनों रायपुर के जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के भीषण अग्निकांड में प्राइवेट स्कूल के मान्यता,आरटीई में भर्ती,फीस नियामक से संबंधित दस्तावेज जलने पर न्यायालय का ध्यानाकर्षण करते हुए बताया कि इस मामले में न्यायालय के संज्ञान लेने के बाद से ही शिक्षा विभाग में खलबली मची हुई थी, और अपने खिलाफ कार्यवाही से डरते हुए षडयंत्रपूर्वक एक कार्यालय ही जला दिया गया, जिसमें विगत दो दशक के सभी दस्तावेज खाक हो गए। हालांकि सूचना का अधिकार के तहत प्राप्त जानकारियों का रिकॉर्ड उनके पास उपलब्ध है।
शिक्षा माफिया द्वारा धमकी
विकास तिवारी ने उनके इस मुद्दे को उठाने पर शिक्षा माफिया द्वारा धमकी एवं उन पर खतरा होने की बात भी बताई।







