दिल्ली:कभी किसी नेता की टोपी चर्चित होती थी, कभी किसी की जैकेट…
पर यहाँ तो बस एक हल्की सी हवा चली,
और किसी ने कंधे पर रखा #गमछा हवा में घुमा दिया—
बस, इतना काफी था…
पल भर में बिहार के करघों पर चरखे घूमने लगे,
कारीगरों के घरों में बिजली की तरह खबर दौड़ गई –
“अरे! अबकी बार गमछा ही गमछा बनेगा!”
सिर्फ दो दिन में ही पाँच करोड़ से ज्यादा के ऑर्डर!
जिस चीज़ को लोग मजदूर की पहचान समझते थे,
वही अब फैशन और सम्मान का प्रतीक बन चुकी है…
यही होता है असली ट्रेंड सेटर का असर!
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने विभिन्न भाषणों, ‘मन की बात’ कार्यक्रमों और स्वतंत्रता दिवस संबोधनों में ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के मंत्र के तहत कई स्थानीय उत्पादों का जिक्र किया है।
यह बिहारी_गमछे (जिसका हाल ही में बिहार चुनावी जीत के दौरान प्रतीकात्मक उपयोग किया गया, जिसमें मधुबनी आर्ट शामिल था) की तरह ही स्थानीय कारीगरी और संस्कृति को बढ़ावा देने का प्रयास है।गमछा को उन्होंने कोविड काल में मास्क के विकल्प के रूप में भी प्रचारित किया था।मोदी जी ने मन की बात में खादी का बोला तो खादी फैशन सिंबल बन गई… भाषणों में दैनिक जीवन में उपयोग की अपील, जैसे खादी उत्सव 2022 में।75वें स्वतंत्रता वर्ष तक खरीदारी का संकल्प दिया तो पूरा देश खादी की ओर दौड़ पड़ा…
एक बार मेघालय के #एरी_सिल्क के बारे में बताया तो उसकी अप्रत्याशित बिक्री बढ़ गई —
क्योंकि यह पहला ऐसा सिल्क है जिसमें कीड़ों को उबाला नहीं जाता,और तभी से जैन समाज में इसकी स्वीकृति तेज़ी से बढ़ी।एक बार उन्होंने असम की दुकान से #असमी_गमोसा क्या खरीदा,
पूरे असम और बंगाल में गमोसा ट्रेंड बनने लगा।
सिर्फ कपड़े ही नहीं स्थानीय उत्पाद भी चमके।
#बांस का नाम लिया, तो देखते-देखते फर्नीचर से लेकर इथेनॉल तक बनने लगा।किसानों की इनकम बढ़ी तो कुछ नेताजी चोरी-छिपे बांस खरीदकर चमचों को देने लगे ।मिलेट्स का ज़िक्र किया, तो हर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रीलें, रेसिपी और पौष्टिकता की बहार आ गई।बिहार चुनाव से पहले #मखाना बोर्ड बना,किसानों को खेती-बेचने में मदद मिली, और
आज मखाने की मांग और उत्पादन दोनों रिकॉर्ड स्तर पर हैं।
असम की #शोरूमलाई साड़ी का जिक्र किया —
कुछ ही हफ्तों में पूरे देश से मांग आने लगी,
उसके बाद तो GI टैग तक मिल गया।
#कांजीवरम साड़ी फिर से ट्रेंड में आई,
महिलाओं ने मानो फैसला कर लिया — “अबकी बार सिल्क की ही शान!”
और अब… एक साधारण बिहारी गमछा,
मजदूर की पहचान से उठकर ग्लैमर और गर्व की निशानी बन गया है।
सुना है—कल तक बिहार के कारीगरों को 5 करोड़ से अधिक का ऑर्डर मिल चुका है।
यह सिर्फ व्यापार नहीं—यह विश्वास का आँकड़ा है।
ये मोदी के व्यक्तित्व की ताकत है,
जहाँ लोग उसके शब्द नहीं, उसके इशारे को भी दिशा मान लेते हैं।
और इसका सबसे बड़ा प्रमाण हमने कोविड काल में अपनी आँखों से देखा है…
Sharad rai🙏










