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रायपुर:शंकराचार्य आश्रम में अनवरत चल रही सत्सङ्ग सभा मण्डप में दण्डी स्वामी डॉ इंदुभवा नंद महाराज ने चातुर्मास्य व्रत अनुष्ठान के 96 वें दिन आश्रम में प्रतिष्ठित माँ भगवती श्रीत्रिपुरसुन्दरी माता की दिव्य महिमा की व्याख्या की।स्वामीजी के द्वारा शारदीयनवरात्रि से प्रारंभ इस श्रृंखला में माताश्री के सहस्रनामों की विशद व्याख्या की जा रही है।
दण्डी स्वामी डॉ इंदुभवा नंद महाराज ने कहा पञ्च ब्रह्माण्ड में विराजमान पञ्च शक्तियां जिनका संचालन कर रही हैं वह भगवती ही है बेटी. स्थिति: प्रलय. अनुग्रह, संहार, तिरोधान के द्वारा संचालित करती हैं. इनके ये विभाग उन्हीं की कृपा से संभव है, उन्होंने मां भगवती के कामाक्षी- नाम की अद्भुत व्याख्या की।उन्होंने कहा हमारी इच्छा शाक्ति,कामना पूर्ति उन्हीं के द्वारा संभव है. का” का अर्थ लक्ष्मी एवं ‘म’ सरस्वती का वाचक है जो भगवती के दोनों नेत्रों में विराजमान है, वही कामदायिनी भी है। वे स्वयं भगवान शंकर की स्वामिनी हैं, भगवान शिवाजी भी उनके वश में हैं। शिवजी की कृपा उनके द्वारा ही प्राप्त होती है। उनके अनेक नामों की विशद व्याख्या स्वामी महाराज जी ने की।
शंकराचार्य आश्रम में बड़ी संख्या में भक्त जनों ने इस अवसर पर सत्संग का लाभ प्राप्त किया।दण्डी स्वामी डॉ इंदुभवा नंद महाराज के चातुर्मास्य व्रत अनुष्ठान का 4 नवंबर को सम्पूर्ति सत्र आयोजित की जाएगी।प्रतिदिन आश्रम में प्रात: से लेकर रात्रि 9 बजे तक अनवरत विविध अनुष्ठान आयोजित होते हैं।रात्रि में प्रवीण ठाकुर परिवार के सदस्यों ने भजनों की शानदार प्रस्तुति भी दी।








