
रायपुर:आज सुभाष तिवारी जी का जन्मदिन है, उस दौर के लोगों ने उन्हें 1986-87 का उसे दौर में देखा है जब भाजपा व भाजयुमो में चंद लोग हुआ करते थे और सुभाष तिवारी जी जिला युवा मोर्चा के अध्यक्ष थे।
दमदार शख्सियत थी , संजय नगर में में रोड पर अच्छा खासा लकड़ी का व्यवसाय था ट्रक थी उन सब के बीच पूरे समय निकालकर पार्टी के काम में रमे रहते थे । मैने उन्हें दरी बिछाते, झंडा लगाते, वाल राइटिंग करते डंडा खाते, जेल जाते, पुलिस से लड़ते झगड़ते ,नुक्कड़ सभा लेते सभी स्वरूप में देखा है व उनके साथ काम किया है।
भाषण कला में निपुण सुभाष भैया ने श ब्रजमोहन अग्रवाल जी , ओम प्रकाश पुजारी जी एवं दएवं जी भाई पटेल के साथ कंधे से कंधा मिलाकर युवा मोर्चा की एक बड़ी टीम खड़ा किया था , दूर-दूर तक सत्ता का कोई उम्मीद नहीं , खाली सड़कों पर संघर्ष , उस दौर में जब कार्यकारिणी के गठन के लिए कोरम पूरा करने तक नाम नहीं मिलता था उस समय युवाओं को युवा मोर्चा में जोड़कर छत्तीसगढ़ में लगातार आंदोलन प्रदर्शन की नींव रखी । क्योंकि रायपुर छत्तीसगढ़ का मुख्यालय था इस कारण यहां से पूरे छत्तीसगढ़ में माहौल बनता था और भाजयुमो ने वही किया । वह दौर था जब कुछ ना होते हुए भी जब कुछ ना होते हुए भी प्रशासन भाजयुमो नेताओं के धरना प्रदर्शन से घबराता था ।सब के सब युवा थे संघर्षशील थे किसी के पास गॉडफादर नहीं था, सब अपने ही आपके गॉडफादर थे पर सबमे एक चीज जरूर थी, एक चीज जरूर थी सब के सब पराक्रमी थे , परिक्रमा इन सब लोगों के तासीर में नहीं! उस दौर में संघर्ष करने वाले ज्यादातर लोगों के साथ यही बड़ी समस्या थी कि वह परिक्रमा नहीं कर सकते थे पराक्रम जरूर करते थे पर आज का दौर परिक्रमा का दौर हो गया है , अब अब इस उम्र में यह सब अपनी तासीर नहीं बदल सकते , उसे दूर के ज्यादातर लोग कार्यकर्ताओं व जनता के नेता थे फेसबुक सोशल मीडिया व ऊपर वालों के नहीं।
आज सुभाष भैया के जन्मदिन पर एक ही चीज कहूंगा कि उन्होंने जो पाया अपने पराक्रम से पाया है संघर्षों का फल तो उन्हें अब तक नहीं मिला पर एक बात की खुशी है की भगवान ने उन्हें स्वस्थ शरीर स्वस्थ मन एवं सुखी परिवार दिया है जो किसी के पास सबसे बड़ी पूंजी होती है बहुतों के पास ऐसी पूंजी नहीं है ।
सुभाष भैया के साथ अब तक बिताए हुए क्षण मेरे लिए बहुत यादगार है मैंने राजदूत मोटर सायकल चलाना उन्हीं के मोटरसाइकिल से सीखा था वह भी चाबी की जगह 5 इंची खीला लगाकर ।
भगवान उन्हें इसी तरह स्वस्थ रखें ,मस्त रखें ,प्रसन्न रखें ,और निरोगी रखें मैंने तो उनसे बहुत कुछ सीखा है मैं जब रायपुर आया तो भाजपा में मेरी पहली मुलाकात होने वाला नेता ही वही थे , मै तो राजनीति से कोसों दूर एक छात्र नेता के रूप में गांव से आए छात्र-छात्राओं की राजनीति करता था। दूसरी बात मीनाक्षी भाभी से भी मेरा पारिवारिक संबंध था अभनपुर क्षेत्र के होने के कारण और उन दोनों का स्नेह भी आज तक मुझे मिलता रहा है।









