रायपुर÷ शंकराचार्य आश्रम बोरिया कला में चल रही श्रीमद् भागवत की कथा का विस्तार करते हुए शंकराचार्य आश्रम के प्रभारी डॉ. स्वामी इन्दुभवानन्द तीर्थ महाराज ने बताया कि जो काम भगवान नहीं कर सकते हैं, वह काम उनके भक्त कर देते है। भगवान श्री कृष्ण अपने माता-पिता देवकी वसुदेव को तीन जन्म से मुक्त नहीं कर पाए थे। जब भी भगवान अपने पिता को ब्रह्म ज्ञान का उपदेश देते थे माता-पिता का वात्सल्य सामने आ जाता था प्रथम जन्म में भगवान सुतपा के रूप में आए तब भी अपने माता-पिता का उद्धार नहीं कर सके दूसरे जन्म में भगवान कश्यप अदिति के रूप में आए तब भी अपने माता-पिता का उद्धार नहीं कर पाए अब तीसरे जन्म में भगवान श्री कृष्ण के रूप में आए और उनके माता-पिता वसुदेव देवकी के रूप में प्रकट हुए इस जन्म में भी भगवान को लगा कि हमारे माता-पिता मुक्ति से वंचित हो जाएंगे तो उन्होंने नारद जी का सहयोग लिया ।नारद जी ने वसुदेव देवकी को नवयोगीश्वर संवाद सुना करके मुक्त कर दिया। भगवान जहां हारते हैं भक्त वहां जीत जाते हैं। जो काम भगवान नहीं कर सकते हैं वह काम भक्त कर देते हैं, इसलिए श्रीमद्भागवत भगवान का पुराण नहीं है यह भगवान के भक्तों का पुराण है।

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