रायपुर: शंकराचार्य आश्रम बोरियाकला में परम पूज्य ज्योतिष्पीठाधीश्वर एवं द्वारका शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य ब्रह्मलीन स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती महाराज का तृतीय #निर्वाण दिवस# बड़ी धूमधाम से गुरु भक्तों ने मनाया।
प्रातः काल से ही भगवान सिद्धेश्वर का अभिषेक पराम्बा भगवती राजराजेश्वरी की आरती तथा गुरु पादुका पूजन एवं राजराजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी का विभिन्न द्रव्यों से समस्त भक्तों ने मिलकर के अर्चन संपन्न किया तथा विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विशेष रूप से शंकराचार्य आश्रम के प्रभारी डॉ. स्वामी इन्दुभवानन्द तीर्थ जी महाराज राजिम आश्रम से पधारे परम पूज्य ब्रह्मचारी सिद्धेश्वरानंद जी महाराज नरसिंह चंद्राकर श्रीमती मयंका पाण्डेय, आचार्य धर्मेंद्र, शास्त्री सौरभ शास्त्री भरत साहू नंदकिशोर देवांगन, खिलावन साहू, राधे साहू, संदीप महाराज भुवनेश्वर प्रसाद यादव श्रवण बुधबानी नीना बुधवानी आदि विशिष्ट गुरु भक्त उपस्थित थे। डॉ इन्दुभवानन्द तीर्थ महाराज ने बताया की गुरु व्यक्ति नहीं तत्व होता है भगवान ही गुरु के रूप में आते हैं और शिष्य की हृदय की अंधकार को नष्ट करके ज्ञान के प्रकाश से उसके हृदय को आलोकित कर देते है।अतः गुरु में कभी मनुष्य बुद्धि नहीं रखना चाहिए जो गुरु में मनुष्य बुद्धि रखता है उसका उद्धार नहीं होता है। हमारे गुरु महाराज पूज्य ज्योतिष्पीठाधीश्वर एवं द्वारका शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज सनातन धर्म के सिद्धांत के अनुसार ही अपना जीवन यापन करते थे तथा उसका ही प्रचार प्रसार करते थे। ब्रह्मचारी श्री सिद्धेश्वर आनंद महाराज ने अपने विचार व्यक्त करते हुए बताया कि गुरु मनुष्य नहीं देवता होता है इसलिए गुरु की पूजा देवता से पहले की जाती है नरसिंह चंद्राकर ने अपनी बात रखते हुए बताया कि पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज सनातन धर्म की रक्षक थे। पूरा जीवन उनका सनातन धर्म के सिद्धांतों के प्रचार प्रसार में ही समर्पित था।







