रायपुर:दशकों बाद रायपुर शहर की सड़कों ने गणेशोत्सव में ऐसा नज़ारा देखा, जिसने हर किसी को चौंका दिया। शाम से लेकर देर रात तक धर्मप्रेमियों का जनसैलाब उमड़ा और जगह-जगह ट्रैफिक जाम की स्थिति बन गई। पूरा शहर मानो गणेश भक्ति में डूब गया हो।
आपको याद होगा तो एक समय था जब पुरानी बस्ती लोहार चौक पुरानी बस्ती थाना चौक कंकाली पर नवभारत चौक गोल बाजार रामसागर पर पंजाब आज मिल गली और गुढ़ियारी में ऐसी भीड़ लगती थी 5 घंटे की लाइन झांकी देखने के लिए लगती थी
आज सुंदरनगर मेन रोड से लेकर अश्वनी नगर, लाखेनगर, पुरानी बस्ती, ब्रम्हाणपारा, तात्यापारा, बुढ़ापारा, टिकरापारा, वीरभद्र नगर, मठपारा और राठौर चौक तक हर इलाका गणेश पंडालों की भव्यता और सजावट से जगमगा उठा। नज़ारा ऐसा था मानो पूरा शहर और आसपास के गाँव सड़कों पर उमड़ आया हो।
हर पंडाल बना श्रद्धा का संसार
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पुरानी बस्ती और लाखेनगर क्षेत्र में सजावट इतनी आकर्षक थी कि परिवार, बच्चे और बुज़ुर्ग सभी दर्शन के लिए निकल पड़े। भीड़ इतनी बढ़ गई कि एक-एक कदम चलना मुश्किल हो गया। गाड़ियों की लंबी कतारें, हॉर्न की गूंज और ट्रैफिक जाम के बावजूद लोग पैदल ही आगे बढ़ते रहे।
तात्यापारा में संगीत की धुन पर भीड़ झूम उठी, वहीं लाखेनगर के हिंद स्पोर्टिंग मैदान में भारी जनसैलाब उमड़ा। माहितोष चौक पर समिति के लोग व्यवस्था संभालते नज़र आए, लेकिन अधिकांश जगहों पर प्रबंधन पंडाल समितियों और गणेश भगवान के भरोसे ही चलता दिखा।
भक्तों का उत्साह कल्पना से परे
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शीतला मंदिर अमीनपारा से लाखेनगर चौक, आमापारा चौक, आजाद चौक, तात्यापारा चौक और पुरानी बस्ती थाना चौक तक पहुँचने में लोगों को दो घंटे से अधिक का समय लगा। इस दौरान न जाने कितने पुराने परिचितों और परिवारों से मुलाक़ात हुई। भीड़, धक्का-मुक्की और जाम के बावजूद लोग प्रसन्न नज़र आए।
वर्षों बाद रायपुर में ऐसी धार्मिक जागृति देखने को मिली। शहर में स्थापित गणेश प्रतिमाएँ और उनकी अद्भुत सजावट भक्तों को आकर्षित करती रहीं। भीड़ देखकर लगा मानो जनता की आस्था कल्पना से भी परे हो।
श्रद्धा और उल्लास का संगम
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गली-गली में गाड़ियाँ खड़ी थीं, लोग पैदल निकल पड़े थे, फिर भी वातावरण में शिकायत नहीं बल्कि उल्लास और भक्ति की भावना गूँज रही थी।
यह सिर्फ़ एक उत्सव नहीं बल्कि रायपुर की संस्कृति, आस्था और सामूहिकता का जीवंत संगम था।








