रायपुर: शंकराचार्य आश्रम बोरियाकला रायपुर में चातुर्मास प्रवचन माला के क्रम को गति देते हुए शंकराचार्य आश्रम के प्रभारी डॉ. स्वामी इन्दुभवानन्द तीर्थ महाराज ने शिव पुराण की कथा को विस्तार देते हुए बताया कि भगवान शिव की निंदा करने से गौ हत्या के बराबर पाप लगता है उन्होंने कथा को प्रसंग देते हुए बताया कि व्याघ्रपाद के पुत्र उपमन्यु ने भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए अत्यंत कठोर तपस्या की। तपस्या के प्रभाव से भगवान शिव प्रसन्न हो गए ब्रह्मा विष्णु आदि की प्रेरणा से भगवान शिव उपमन्यु की परीक्षा लेने के लिए इंद्र के रूप में सामने उपस्थित हुए और कहा वरदान मांगो। मैं तुमको वरदान देने के लिए आया हूं उपमन्यु ने कहा कि मैं केवल भगवान शिव से ही वरदान लेना चाहता हूं इंद्र ने भगवान शिव की निंदा की। उपमन्यु ने क्षुब्ध होकर के कहा कि मैं तुमसे वरदान नहीं चाहता हूं। शिव की उपासना की है मैं उन्हीं से वरदान चाहता हूं और कहा तुम शिव को नहीं जानते हो वह महादेव हैं समस्त देवताओं के अधिश्वर हैं, ब्रह्मवादी लोग उन्हें सत् असत् व्यक्त, अव्यक्त नित्य तथा अनेक बताते हैं तात्विक लोग उन्हें तर्क से परे तथा सांख्यवादी लोग उनको तात्पर्य मानते हैं उन्हीं शंभू से मैं वरदान चाहता हूं जो समस्त कर्मों के कारण है, मेरे पूर्व जन्म के पापों के कारण ही आज मुझे शिव की निंदा सुनाई पड़ रही है, शिव निंदा सुनने से गौ हत्या के समान पाप लगता है और प्रतिकार करने से शिवलोक की प्राप्ति होती है। इतना सुनकर के भगवान शिव प्रसन्न हो गये और उन्होंने इंद्र का रूप त्याग करके शिव के रूप में उनके सामने उपस्थित हो गए और वरदान दिया की पार्वती तुम्हारी माता रहेगी और तुम सदा कुमार रहोगे, ऐसा कहते हुए भगवान शिव ने उपमन्यु को क्षीर सागर ही प्रदान कर दिया।
कथा के पूर्व शंकराचार्य आश्रम के वैदिक विद्वान गणों ने शिव जी का पूजन करके आरती की तथा जगद्गुरु कुलम् के छात्रों एवं अध्यापकों ने वैदिक मंगलाचरण ने किया।

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