
Oplus_0
रायपुर: शंकराचार्य आश्रम में चल रहे चातुर्मास प्रवचन माला के क्रम को गति देते हुए शंकराचार्य आश्रम के प्रभारी डॉ. स्वामी इन्दुभवानन्द तीर्थ महाराज ने शिव पुराण की कथा को रेखांकित करते हुए बताया कि शिव और विष्णु में कोई भेद नहीं है जो भी शिव व विष्णु में भेद करता है वह मंद मति व अल्पबुद्धि माना जाता है। शास्त्र का ज्ञान न होने के कारण लोगों के मन में भेद बुद्धि आ जाती है जो उनके पतन का कारण बनती है। वस्तुतः इन दोनों में कोई भेद नहीं है तात्विक दृष्टि से इन दोनों को हरिहर के नाम से जाना जाता हैं। एक का नाम हर अर्थात शंकर, दूसरा का नाम हरि अर्थात विष्णु है।उन्होंने कहा भगवान शिव के परम पूज्य उपासक विष्णु हैं, और भगवान विष्णु के परम पूज्य उपासक शिव है। भगवान विष्णु शिव जी की उपासना करते हैं उन्होंने रामेश्वर में शिव की स्थापना करके यह सिद्ध कर दिया है तथा शिवजी की उपासना करके चक्र सुदर्शन भी प्राप्त कर लिया है। और भगवान शिव राम की उपासना करते हैं भगवान शिव ही एकादश रुद्र के रूप में हनुमान बनकर आए, और अपने स्वामी भगवान नारायण जो दाशरथि पुत्र राम के रूप में अवतरित हुए थे,उनकी सेवा में सन्नद्ध रहे। हनुमान जी की सेवा से प्रसन्न होकर भगवान राम ने यही कहा कि है। हे कपि! मैं तुम्हारे ऋण से कभी उऋण नहीं हो सकता हूं। भगवान राम भी ऋणी है हनुमान जी के।
कथा के पूर्व शंकराचार्य आश्रम के वैदिक विद्वान गणों ने भगवान शिव का पूजन करके आरती संपन्न की तथा जगद्गुरुकुल के छात्रों एवं आचार्यों में वैदिक मंगलाचरण किया।









