रायपुर: शंकराचार्य आश्रम में चातुर्मास प्रवचन माला के क्रम को गति देते हुए शंकराचार्य आश्रम के प्रभारी डॉ. स्वामी इन्दुभवानन्द तीर्थ महाराज ने शिव कथा के प्रसंग को विस्तार देते हुए बताया कि भगवान शिव के भक्तों पर चक्र सुदर्शन भी निष्फल हो जाता है। उन्होंने कहा भगवान शिव की आज्ञा से भगवान श्री कृष्ण ने बाणासुर की 996 भुजाओं को चक्र सुदर्शन के द्वारा काट दिया जब भगवान श्री कृष्ण चक्र सुदर्शन से बाणासुर का सिर काटने लगे तो भगवान शिव ने कहा की है देवकीपुत्र! आप चक्र सुदर्शन से बाणासुर का सिर मत काटिए, मेरी आज्ञा से अपने चक्र सुदर्शन को लौटा लीजिए क्योंकि मेरे भक्त के ऊपर सदा यह चक्र निष्फल ही रहेगा।
हे गोविंद संग्राम में मैंने आपको यह अनिवार्य सुदर्शन चक्र दिया था इसलिए इस विजय चक्र को युद्ध भूमि से लौटा दीजिए पहले भी आपने यह सुदर्शन चक्र दधीचि रावण तथा तारक आदि के ऊपर मेरी आज्ञा की बिना नहीं चलाया अतः आप मेरी आज्ञा का पालन करते हुए अपने चक्र को लौटा लीजिए। बाणासुर मेरा भक्त है, इस पर आपका चक्र निष्फल हो जाएगा, मैंने इस वरदान दे दिया है कि तुम्हें मृत्यु का भय नहीं रहेगा अतः मेरा वचन सदा सत्य होगा भगवान श्री कृष्ण ने भगवान शंकर की बात को स्वीकार करके भगवान श्री कृष्ण ने भी कहा कि मैंने भी बलि को यह वरदान दिया है कि तुम्हारे कुल के किसी भी दैत्य का मैं वध नहीं करूंगा। वास्तव में श्री कृष्णा और शंकर जी में कोई भेद नहीं है दोनों हरिहर के रूप में जो इनमें भेद करता है वह अल्प बुद्धि वाला मूर्ख अनंत वर्षों तक घोर नरक की यातनाएं प्राप्त करता है।
कथा के पूर्व श्री शंकराचार्य आश्रम की वैदिक विद्वानों ने शिवजी का पूजन करके आरती की तथा जगद्गुरुकुल के समस्त छात्रों और अध्यापकों ने मंगलाचरण संपन्न किया

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