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रायपुर: शंकराचार्य आश्रम में चल रहे चातुर्मास प्रवचन माला के क्रम को जारी रखते हुए शंकराचार्य आश्रम के प्रभारी डॉक्टर स्वामी इंदु भवानंद तीर्थ महाराज ने बताया कि बुद्धिमान व्यक्ति को कभी भी कहीं भी मृत्यु से भयभीत नहीं होना चाहिए, क्योंकि समस्त उपाय के करने पर भी मृत्यु को रोका नहीं जा सकता है। जलंधर अपने वीरों को उपदेश देते हुए कह रहा है कि युद्ध भूमि में मर जाना अच्छा है। यह सभी कामनाओं का फल देने वाला है। उन्होंने कहा यश की प्राप्ति करने वाला है। तथा विशेष कर मोक्ष देने वाला भी कहा गया है। जो रणभूमि में युद्ध करते हुए मारा जाता है वह सन्यासी एवं परम ज्ञानी होता है, और सूर्य मंडल को भेदकर परम पद को प्राप्त हो जाता है इसलिए मृत्यु से वीर पुरुष को बिल्कुल ही नहीं डरना चाहिए। मृत्यु तो जन्म लेने वाले के शरीर के साथ ही पैदा होती है। वह मृत्यु आज हो अथवा 100 वर्ष बाद आये। प्राणियों की मृत्यु तो निश्चित ही होती है।अतः देश समाज व जाति की रक्षा करते हुए यदि मृत्यु हो तो वह मोक्ष देने वाली होती है।
कथा के पूर्व जगद्गुरु कुलम् के छात्रों में मंगलाचरण किया तथा शंकराचार्य आश्रम के वैदिक विद्वानों ने शिव पूजन के पश्चात आरती की।








