रायपुर: जगद्गुरु शंकराचार्य आश्रम में आज यति चक्र चूड़ामणि धर्म सम्राट् स्वामी हरिहरानंद करपात्री जी महाराज का जयंती महोत्सव तथा परमाराध्य परम धर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती जी महाराज का वर्धन्ति(जनमदिन) महोत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया गया। प्रातः काल के कार्यक्रम में भगवती राजराजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी की मंगला आरती की गई तत्पश्चात श्रृंगार आरती मध्याह्ण में भगवान शिव की प्रसन्नता के लिए पार्थिवेश्वर शिव का दुग्ध अभिषेक भी किया गया विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। तथा समस्त ब्राह्मणों का सम्मान एवं जगद्गुरुकुलम् के छात्रों का सम्मान शंकराचार्य आश्रम के पुजारी श्री धर्मेंद्र आचार्य जी ने किया। शंकराचार्य महाराज जी के समस्त भक्तों ने सम्मिलित होकर इसमें भाग लिया सायंकाल विचारगोष्ठी का आयोजन किया जिसमें विभिन्न विद्वानों ने अपने-अपने विचार व्यक्त किये।
शंकराचार्य आश्रम के प्रभारी डॉ.इन्दुभवानन्द स्वामी महाराज ने शंकराचार्य परंपरा के विषय में बताते हुये कहा कि भगवान स्वयं शंकर सनातन धर्म के उद्धार के लिए शंकराचार्य के रूप में अवतरित हुए और उन्होंने सनातन धर्म की रक्षा की। सनातन धर्म सदा सर्वदा अक्षुण्य बना रहे, इस हेतु उन्होंने भारत की चार दिशाओं में चार आम्नाय पीठों की स्थापना की पूर्व में गोवर्धन पुरी, दक्षिण में श्रृंगेरी, पश्चिम में द्वारका शारदा मठ एवं उत्तर में ज्योर्तिमठ की स्थापना की। उन्होंने कहा ये चारों पीठ आज भी सनातन धर्म की रक्षा के लिए सन्नद्ध होकर के कार्य कर रहे। उन्ही चार पीठों में से ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती जी महाराज का आज वर्धन्ति(जन्मदिन) महोत्सव का आयोजन संपन्न हुआ। परम पूज्य शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती जी महाराज का इस समय चातुर्मास व्रत अनुष्ठान मुंबई में चल रहा है।








