रायपुर:राजधानी के श्री शंकराचार्य आश्रम बोरियाकला में परम पूज्य दंडी स्वामी डॉक्टर इंदु भवानंद तीर्थ महाराज का प्रथम चातुर्मास आषाढ़ पूर्णिमा से प्रारंभ हुआ है।
दंडी स्वामी डॉक्टर इंदु भवानंद तीर्थ महाराज ने कहा सन्यासियों के लिए चातुर्मास एक विशेष अनुष्ठान माना जाता है। चातुर्मास काल में सन्यासी वेद अध्ययन वेदांत चिंतन और उपासना करते हैं। अपने अन्य समय में सन्यासी गण समस्त वर्ष पर्यंत भ्रमण करके धर्म प्रचार और धर्म रक्षा के कार्य में संलग्न रहते हैं।उन्होंने कहा केवल चातुर्मास के काल में ही स्वाध्याय के द्वारा अपने ज्ञान को नवीनता प्राप्त करते हैं।
दंडी स्वामी डॉक्टर इंदु भवानंद तीर्थ महाराज के प्रथम चातुर्मास में शंकराचार्य आश्रम में आज प्रातः काल से भगवान शिव का अभिषेक और पार्थिव पूजन किया गया,जो अनवरत चलेगा। भगवान शंकर की आठ प्रत्यक्ष मूर्तियां मानी जाती हैं पांच तत्वों के रूप में भी भगवान शिव विराजमान होते हैं सूर्य के रूप में भगवान सूर्य विराजमान होते हैं चंद्रमा के विरोध में ही भगवान शिव विराजमान होते हैं और यजमान के रूप में भी इसलिए 8 प्रत्यक्ष मूर्तियां भगवान शिव की मानी जाती हैं। इस समय भगवान शिव के पूजन करने से प्राणियों का सर्व कल्याण होता है। इसी भावना से भावित होकर शंकराचार्य आश्रम के समस्त बटुक गण तथा ब्रह्मचारी गण सम्मिलित होकर के भगवान शिव की उपासना कर रहे हैं।

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