नई दिल्ली:ओडिशा के बालासोर में हुए दर्दनाक हादसे ने हर किसी को गमगीन कर दिया है.भारतीय रेलवे के प्रवक्ता अमिताभ शर्मा ने कहा कि इस मार्ग पर कवच प्रणाली उपलब्ध नहीं थी. इस हादसे के बाद कवच को लेकर फिर बात होने लगी है. रेल मंत्रालय ने पिछले साल कवच टेक्नोलॉजी की टेस्टिंग की थी. इसका प्रचार किया गया था.रेलवे के अनुसार इस टेक्नोलॉजी से उसे जीरो एक्सीडेंट के अपने लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी. इसके जरिए सिग्नल जंप करने पर ट्रेन खुद ही रुक जाएगी. एक बार लागू होने के बाद इस पूरे देश में लगाने के लिए प्रति किलोमीटर 50 लाख रुपये खर्च होंगे. जानकारी के मुताबिक- ये सिस्टम तीन स्थितियों में काम करता है – जैसे कि हेड-ऑन टकराव, रियर-एंड टकराव, और सिग्नल खतरा.अब तक की जानकारी के मुताबिक ही सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है. जबकि 900 से ज्यादा घायलों की खबर आ रही है.
रेल मंत्रालय देश भर में एक टक्कर रोधी प्रणाली “कवच” स्थापित करने की प्रक्रिया में है. यह कवच अलर्ट करता है कि जब ट्रेन सिग्नल को पार करती है (सिग्नल पास एट डेंजर – SPAD), जो ट्रेन टक्करों का प्रमुख कारण है.यह सिस्टम ट्रेन के ड्राइवर को सतर्क कर सकता है, ब्रेक को नियंत्रित कर सकता है और उसी ट्रैक पर दूसरी ट्रेन को नोटिस करने पर ट्रेन को रोक सकता है. रेलवे के प्रवक्ता अमिताभ शर्मा ने कहा कि दुर्घटना में शामिल मार्ग पर कवच उपलब्ध नहीं था.






