
रायपुर:मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित हिंदी भवन में रविवार 21 मई 2023 को गुरु गोरखनाथ विकास संगठन (मध्य प्रदेश) द्वारा ‘नाथ संप्रदाय सामाजिक महाकुंभ’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मध्य प्रदेश में गुरु गोरखनाथ कल्याण विकास बोर्ड की स्थापना, उच्य शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों के लिए निःशुल्क छात्रावास एवं संप्रदाय की सभी जातियों तथा उप-जातियों को अति-पिछड़ा वर्ग (DNT) की सूची में शामिल करने की तीन प्रमुख माँगो को उठाना था। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री श्री कमलनाथ, विशिष्ठ अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ के पूर्व विधायक एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के नेता अमित जोगी एवं कार्यक्रम की अध्यक्षा के रूप में उर्मिला योगी, अध्यक्ष, (राज्यमंत्री) विमुक्त घुमन्तु एवं अर्द्ध घुमन्तु कल्याण बोर्ड, (राजस्थान) उपस्थित थी।
अमित जोगी ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए रंजीता राहुल जोगी एवं ई. राहुल जोगी को धन्यवाद देते हुए कहा कि मैं यहाँ किसी नेता के रूप में नहीं बल्कि अपने समाज-परिवार के लोगों के बीच, एक बेटा, एक भाई बनकर आया हूँ। उन्होंने गुरु गोरखनाथ और नाथ संप्रदाय के गौरवशाली इतिहास को याद करते हुए वर्तमान सरकारों द्वारा समाज की उपेक्षा पर चिंता व्यक्त की।उन्होंने कहा कि “आज, भारत के कोने-कोने से लेकर विदेशों में फैले नाथ समाज के लोगों को एक साथ जोड़ने की बड़ी ज़रूरत है। अब तक अलग-अलग राज्यों में नाथ संप्रदाय को अलग-अलग तरीक़े से कुछ अधिकार दिए गए हैं, लेकिन विशेषकर ‘मध्य प्रदेश’ और ‘छत्तीसगढ़’ में संप्रदाय के लोगों को अब तक उनका सही हक़ एवं सम्मान नहीं मिला है।”
सत्तारूढ़ दल पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि “सत्ता में बैठे एक दल विशेष द्वारा धर्म की रक्षा और हिंदुत्व के प्रचार के नाम पर देश को टुकड़ों में बाँटा जा रहा है। महान ऋषियों, तपस्वियों और संतों की इस पावन धरा पर धर्म को भी सिर्फ अपना राजनीतिक हित साधने के लिए प्रोपेगंडा बना कर चलाया जा रहा है। बाबा गोरखनाथ का ये नाथ संप्रदाय लोगों को जोड़ने का संदेश देता है, व्यक्ति की जात या धर्म देखकर उसका आंकलन नहीं करता। जब तक स्थानीय मुद्दों को छोड़कर सिर्फ चीन और पाकिस्तान की बात होती रहेगी, तब तक भारत का आगे बढ़ना असंभव है। हमें भगवान के नाम पर सिर्फ वोट लेने वाले नहीं, भगवान का काम करने वाले चाहिए! और इस बदलाव की शुरुआत ‘नाथ संप्रदाय’ ही कर सकता है।”










