रायपुर:आयुर्वेद मिशन ने डिजिटल हेल्थ एण्ड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में इनोवेशन का आयुर्वेद विषय पर आभासी माध्यम से वैज्ञानिक संगोष्ठी का आयोजन किया। जिसमें ब्राह्मणपारा रायपुर छत्तीसगढ़ के ख्यातिलब्ध रस शास्त्री डॉ राजशेखर पांडे एवं आयुर्वेद संकाय चिकित्सा विज्ञान संस्थान बीएचयू के काय चिकित्सा विभागाध्यक्ष प्रोफेसर राजेंद्र प्रसाद ने अपने विचार साझा किये।
डॉ राजशेखर पाण्डेय ने आयुर्वेदिक औषधि निर्माण के क्षेत्र में डिजिटलीकरण एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को बहुत उपयोगी बताया। इससे ना केवल औषधीय की गुणवत्ता बढ़ाई जा सकेगी अपितु एकरूपता एवं समय की बचत भी हो सकेगी। डॉ पाण्डेय ने मेटल एंड मेटेलोफार्मास्यूटिकल्स पर प्रकाशित अपनी पुस्तक में
आयुर्वेदिक मेटलर्जी के क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान दिया है। उनकी पुस्तक को इनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका में स्थान भी मिला है। डॉ राजशेखर पाण्डेय कि यह बहुभाषी ग्रंथ अपने विषय पर विश्व की इकलौती कृति है। इसे आईटी बीएचयू से भी मान्यता प्राप्त है।
डॉ राजेंद्र प्रसाद ने अनेकों सेमिनार एवं कांफ्रेंस के माध्यम से आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान देने के साथ-साथ पीड़ित मानवता की सेवा में अहम भूमिका निभाई है। डॉ प्रसाद ने डिजिटल हेल्थ एवं ए आई को आयुर्वेद के नवोन्मेष के लिए अत्यंतआवश्यक बताया। इस अवसर पर विश्व आयुर्वेद मिशन के संस्थापक अध्यक्ष प्रोफेसर जीएस तोमर ने डॉ राजशेखर पांडे को मिशन का ‘पद्मश्री प्रोफेसर राम हर्ष सिंह स्मृति नागार्जुन अवार्ड एवं डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद को पद्मश्री प्रोफेसर राम हर्ष सिंह स्मृति मेरीटोरियस सर्विस अवार्ड’ से सम्मानित किया। मिशन के महासचिव डॉक्टर डीपी आर्य ने दोनों चिकित्सा वैज्ञानिकों को उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए बधाई दी एवं भविष्य में भी पीड़ित मानवता की सेवा में संबद्ध रहने की सलाह दी। आयोजन सचिव डॉक्टर अवनीश पांडेय ने आयुर्वेद के सशक्त हस्ताक्षर स्मृति शेष पद्मश्री प्रोफेसर राम हर्ष सिंह की स्मृति में मिशन द्वारा निर्धारित पुरस्कारों की विस्तृत जानकारी दी।







