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रायपुर:- पूर्व संसदीय सचिव एवं लोकसभा प्रत्याशी विकास उपाध्याय ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से बताया कि देश को अनुशासन, सेवा और राष्ट्रप्रेम का पाठ पढ़ाने वाले आयोजनों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे खुद भी ईमानदारी और पारदर्शिता की मिसाल हों। लेकिन जब ऐसे ही आयोजनों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगने लगें, तो सवाल सिर्फ पैसे का नहीं, बल्कि पूरे नैतिक ढांचे का खड़ा हो जाता है।बालोद जिले में आयोजित राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी को लेकर जो तथ्य सामने आ रहे हैं, वे बेहद असहज करने वाले हैं। करोड़ों रुपये का खर्च, बिना विधिवत टेंडर, और भौतिक सत्यापन को लेकर गहरी चुप्पी—यह सब किसी सामान्य कार्यक्रम की कहानी नहीं लगती।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने आयोजन स्थल का भौतिक सत्यापन किया था या नहीं?
यदि किया था, तो इतनी भारी अनियमितताएं कैसे नजरअंदाज हो गईं?और यदि नहीं किया था, तो फिर करोड़ों रुपये की राशि किस आधार पर जारी कर दी गई?यह भी समझ से परे है कि पांच करोड़ रुपये के काम में दो करोड़ रुपये केवल अस्थायी शौचालयों पर खर्च हो जाएं। क्या यह जंबूरी थी या अस्थायी निर्माण का महोत्सव? क्या देशभक्ति अब प्रति टेंट और प्रति टॉयलेट के रेट से आंकी जाएगी?शिक्षा विभाग, जो स्वयं छात्रों को नैतिकता, ईमानदारी और जिम्मेदारी का पाठ पढ़ाता है, उसी विभाग की निगरानी में अगर ऐसे आयोजन सवालों के घेरे में आ जाएं, तो जिम्मेदारी तय होना लाज़मी है। करोड़ों रुपये जारी करने वाले अधिकारी, और विभागीय नेतृत्व इस सवाल से नहीं बच सकते कि उन्होंने आखिर किस आधार पर आंख मूंदकर भुगतान को हरी झंडी दी।
यह आयोजन देशभक्ति सिखाने के लिए था लेकिन अब यह सवाल उठ रहा है कि कहीं यह देशभक्ति का आयोजन नहीं, बल्कि टेंडर और भुगतान की कवायद तो नहीं बन गया?
सरकार अक्सर मंचों से ‘भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस’ की बात करती है। अब यह देखने का वक्त है कि वह इसे सिर्फ भाषणों तक सीमित रखती है या ऐसे मामलों में वास्तव में संज्ञान लेती है।
क्योंकि अगर देशभक्ति के नाम पर भी जवाबदेही तय नहीं होगी, तो फिर बाकी सिस्टम से ईमानदारी की उम्मीद करना एक भ्रम ही रहेगा। देश को मजबूत बनाने के लिए केवल नारों की नहीं, नीति और नीयत दोनों की परीक्षा जरूरी है। उपाध्याय ने कहा कि 1200 VIP लोगों के रहने के लिए जो स्विस टेंट बनाये गए है उस पर 64 लाख रूपये का बिल वसूलने का ऑर्डर हुआ है इसी तरह 15000 बच्चो के रुकने के लिए 2000 टेंट बनाये गए है जिसके लिए 76 लाख वसूलने का कार्यादेश हुआ है आइटम नंबर 28 में 2000 टैंट बनाये गए है जिसके लिए 76 लाख रुपये का बिल बनाने का कार्यदेश हुआ हैआयोजन स्थल का मुआयना करने पर सत्य पता चल जाएगा की वहाँ 100 भी टॉयलेट नहीं बनाये गए है 800 के लगभग टेंट बनाये गए है कोई भी पत्रकार एक्टिविस्ट राजनीतिक व्यक्ति जम्बूरी आयोजन स्थल पर जाकर सत्य का आकलन कर सकता है क्योकि यह अस्थायी निर्माण कार्य है इसलिए कल परसो के बाद वहाँ कोई प्रमाण नहीं मिलेगे की कितने टॉयलेट बने कितने टेंट बने और कार्यदेश में दी गई संख्या के हिसाब से भुगतान कर
जनता के पैसों को लूट लिया जाएगा यदि यह प्रश्न ग़लत है
तो माननीय मंत्री जी कोई टीम गठित कर सत्यापन करवाने आदेश करे आयुक्त बयान दे की हमने चेक कर लिया है की
400 टायलेट बने है2000 टेंट लगाए गए है जिला कलेक्टर टीम गठित कर सत्यापित करे की कितने टॉयलेट्स और टेंट बनाये गए है जिला शिक्षा अधिकारी भ्रमण कर भौतिक सत्यापन कर पत्रकारो को बताए की उनके और उनकी टीम द्वारा सत्यापन कर लिया गया है की जम्बूरी कार्यस्थल पर जेम पोर्टल पर बुलाई गई निविदा अनुसार दिनांक 5-1-26 कों दिए गए कार्य आदेश अनुसार 400 टॉयलेट्स और 2000 टेंट का अस्थायी निर्माण कार्य अमर भारत किराया भंडार द्वारा पूर्ण कर दिया गया है ज्ञात रहे कि दो दिन बाद सत्यापन के लिए कोई साक्ष्य प्रमाण नहीं मिलेगे की कितने टॉयलेट और टेंट का निर्माण किया गया और कितने टॉयलेट और टेंट का भुगतान लिया गया पाँच करोड़ के टेंडर में रहने की व्यवस्था और टॉयलेटके लिए तीन करोड़ वसूले जा रहे
जो साफ़ साफ़ दिखाता है कितनी बेहयाई से सरकारी पैसे को लूटा जा रहा है मंत्री जी के चहते ठेकेदार द्वारा क्योकि गजेन्द्र यादव जी के 2015 से 2019 के स्काउट गाइड के आयुक्त कार्यकाल में हुई तीन जम्बूरी में 12 crore से अधिक की सरकार की धनराशि की लूट हुई थी।









