
रायपुर:साल 2025 को संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष घोषित किया गया है।जिसका मुख्य उद्देश्य “सहकारिताएँ एक बेहतर दुनिया का निर्माण करती हैं” (Cooperatives Build a Better World) है, और यह वर्ष गरीबी उन्मूलन, समावेशी विकास और संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्त करने में सहकारी समितियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालता है l
भारत सरकार ने सहकारिता आंदोलन को गांव-गांव तक पहुँचाने के लिए वर्ष 2021 में स्वतंत्र सहकारिता मंत्रालय की स्थापना की। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में देश के हर ग्राम पंचायत तक सहकारी समितियों का विस्तार किया जा रहा है, ताकि किसानों, पशुपालकों और ग्रामीणों को सहकारिता से लाभ मिल सके। सहकारिता के माध्यम से एक बेहतर और समृद्ध ग्रामीणों का निर्माण करना है।
छत्तीसगढ़ में सहकारिता का प्रसार, छत्तीसगढ में 6063 सहकारी समितियाँ कार्यरत
छत्तीसगढ़ राज्य में कुल 11,650 ग्राम पंचायतें हैं, जिनमें 2,058 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियाँ (पैक्स), 1,949 दुग्ध, 1,002 मत्स्य और 1,054 लघु वनोपज सहकारी समितियाँ कार्यरत हैं।
760 नई समितियाँ गठित
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और सहकारिता मंत्री के निर्देश पर अब तक छत्तीसगढ़ में 310 मत्स्य, 297 दुग्ध और 153 लघु वनोपज समितियाँ नई गठित की जा चुकी हैं।
सहकारिता के माध्यम से रोजगार और सशक्तिकरण
राज्य गठन के समय केवल 1,333 सहकारी समितियाँ सक्रिय थीं, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 2573 हो गई है। किसानों को ऋण, बीज, खाद, कीटनाशक और विपणन की सुविधा सुगमता से उपलब्ध हो रही है।
राज्य में 515 नई प्राथमिक कृषि साख समितियाँ भी शामिल हैं। छत्तीसगढ़ में सहकारी समितियों के कुल सदस्य अब 30.26 लाख हैं, जिनमें से 19.38 लाख किसान क्रेडिट कार्ड धारक हैं।








