रायपुर:भारत में जल हमेशा से जीवन, संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की धुरी रहा है। लेकिन समय के साथ बदलते मौसम, अनियमित वर्षा और भूजल स्तर में लगातार गिरावट ने गाँवों में पानी की उपलब्धता को चुनौतीपूर्ण बना दिया। इसी पृष्ठभूमि में देशभर में शुरू हुए “अमृत सरोवर” अभियान ने जल-संरक्षण को एक नए स्वरूप और नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ाया है। यह सिर्फ एक तालाब निर्माण कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनभागीदारी, पर्यावरण-संरक्षण और ग्रामीण विकास का समन्वित मॉडल बन चुका है।
अमृत सरोवर -सोच से साकार तक
प्रधानमंत्री के नेतृत्व में प्रारंभ हुए इस राष्ट्रीय मिशन का उद्देश्य प्रत्येक जिले में अनेक “अमृत सरोवर” विकसित करना है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़े, मिट्टी व जल संरक्षण हो और स्थानीय समुदाय को स्थायी लाभ मिल सके। अमृत सरोवर की संकल्पना तीन प्रमुख आधारों पर टिकी है- जल संचयन, पर्यावरण संरक्षण, ग्रामीण समुदाय की भागीदारी। इस मॉडल में गाँव का हर व्यक्ति पंच-सरपंच से लेकर श्रमिक, किसान और युवा अपनी सक्रिय भूमिका निभाता है।










