
रायपुर:केंद्रीय ट्रेड यूनियनों का संयुक्त मंच आज से मज़दूर-विरोधी और नियोक्ता-समर्थक श्रम संहिताओं के घोर मजदूर विरोधी कदमों के एकतरफ़ा कार्यान्वयन की कड़ी शब्दों में निंदा करते हुए प्रदेश और देशभर 26 नवंबर को इसका जुझारू प्रतिरोध कार्यवाही आयोजित कर जबरदस्त विरोध का ऐलान किया है। संयुक्त मंच की आज रायपुर में हुई एक संयुक्त बैठक में यह निर्णय लिया गया । इस बैठक में सीटू नेता धर्मराज महापात्र, इंटक नेता संजय साहू, दीनानाथ सिंह,ऐक्टू के बृजेंद्र तिवारी, एटक के विनोद सोनी, बीमा कर्मचारियों के नेता सुरेन्द्र शर्मा, राजेश पराते, छत्तीसगढ़ तृतीय वर्ग शास कर्मचारी संघ के नेता तिलक यादव, देवेंद्र साहू, केंद्रीय कर्मचारी समन्वय समिति के नेता दिनेश पटेल, संयुक्त ट्रेड यूनियन कौंसिल के नेता वी एस बघेल प्रमुख रूप से उपस्थित थे । एच एम एस नेता एच एस मिश्रा ने भी इसका समर्थन किया । ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच के हम इसे स्पष्ट शब्दों में केंद्र सरकार द्वारा देश की मेहनतकश जनता के साथ किया गया भ्रामक धोखा करार दिया है ।
संयुक्त मंच ने कहा कि 21 नवंबर 2025 को अधिसूचित चार तथाकथित “श्रम संहिताओं” की यह मनमानी और अलोकतांत्रिक अधिसूचना, सभी लोकतांत्रिक लोकाचारों की अवहेलना करती है और भारत के कल्याणकारी राज्य के चरित्र को नष्ट कर देती है।
दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और स्वतंत्र औद्योगिक महासंघों का संयुक्त मंच इन कठोर श्रम संहिताओं के कार्यान्वयन का उस दिन से विरोध कर रहा है जिस दिन से इन्हें मौजूदा 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को निरस्त करते हुए लागू किया गया था। 2019 में वेतन संहिता लागू होने के बाद तत्काल विरोध प्रदर्शन हुए और जनवरी 2020 में एक देशव्यापी आम हड़ताल हुई। और एक बार जब अन्य तीन श्रम संहिताएं, औद्योगिक संबंध संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता, व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य शर्तें संहिता 2020 सितंबर में लागू हुईं, तो तत्काल विरोध प्रदर्शन हुए और 26 नवंबर को ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच द्वारा संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के ऐतिहासिक दिल्ली चलो के साथ ऐतिहासिक आम हड़ताल की गई। इसके अलावा कई संयुक्त कार्रवाइयां की गईं, जिसके परिणामस्वरूप 9 जुलाई 2025 की आम हड़ताल हुई, जिसमें 25 करोड़ से अधिक श्रमिकों ने भाग लिया और इसका विरोध किया ।
मजदूरों के कड़े प्रतिरोध के बावजूद, बिहार चुनावों में जीत से उत्साहित और मदमस्त केंद्र सरकार ने मीडिया रिपोर्टों और श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के ट्वीट के अनुसार आज से चार श्रम संहिताओं को प्रभावी बनाने के लिए खुद को अत्यधिक सशक्त महसूस किया है। श्रम शक्ति नीति 2025 के मसौदे पर 13 नवंबर को मंत्रालय द्वारा बुलाई गई बैठक में भी केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच ने तुरंत भारतीय श्रम सम्मेलन (आईएलसी) बुलाने और श्रम संहिताओं को खत्म करने का आग्रह किया था। यहां तक कि वित्त मंत्रालय द्वारा 20 नवंबर को आयोजित बजट-पूर्व परामर्श बैठक में भी ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच की ओर से श्रम संहिताओं को खत्म करने और आईएलसी बुलाने का आग्रह किया गया था, जो 2015 के बाद से आयोजित नहीं की गई है और सरकार हठपूर्वक अनुत्तरदायी बनी रही है ।
इसके बजाय, केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की किसी भी अपील, विरोध और हड़ताल पर ध्यान दिए बिना, इस केंद्र सरकार ने नियोक्ता प्रतिनिधियों, भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) और सरकार के अन्य हाशिये के समर्थकों द्वारा बजट-पूर्व परामर्श बैठक में की गई मांगों को पूरा करने के लिए श्रम संहिताओं को प्रभावी बना दिया है। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों का संयुक्त मंच सरकार के इस कदम को सबसे अलोकतांत्रिक, सबसे प्रतिगामी, मजदूर-विरोधी और मालिक-समर्थक बताते हुए कड़े शब्दों में दोहराता है कि मेहनतकश जनता पर इस घातक हमले का इतिहास के सबसे उग्र और सबसे एकजुट प्रतिरोध के साथ सामना किया जाएगा। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने एक स्वर में इन संहिताओं को मजदूरों के जीवन और आजीविका पर नरसंहारक हमला करार दिया है, जो उन्हें गुलाम बनाने और छीनने की कोशिश कर रहे हैं।
इससे मज़दूरों के हर अधिकार और हक़ छीन लिए जाएँगे। अगर ये संहिताएँ लागू हो गईं, तो आने वाली पीढ़ियों की आशाएँ, विश्वास और आकांक्षाएँ खत्म हो जाएँगी।
केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और स्वतंत्र औद्योगिक महासंघों का संयुक्त मंच, सभी क्षेत्रों के प्रदेश के मेहनतकश लोगों से आह्वान करता है कि वे संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के नेतृत्व में किसानों के साथ, 26 नवंबर 2025 को श्रम संहिताओं के कार्यान्वयन के खिलाफ, पूरे देश और प्रदेश में प्रत्येक कार्यस्थल पर, जुझारू प्रतिरोध और अवज्ञा की संयुक्त कार्रवाई में रोष प्रकट करें और श्रम संहिताओं को रद्द करने और श्रम शक्ति नीति 2025 के मसौदे को वापस लेने की मांग करने संयुक्त मंच अपने सभी सदस्यों से आह्वान करता है कि वे अभी से कार्यस्थलों पर काले बैज पहनकर अवज्ञा प्रदर्शित करें। सोमवार से गेट मीटिंग, नुक्कड़ सभाएँ, बस्तियों में बैठकें आदि युद्धस्तर पर आयोजित की जाएगी ताकि केंद्र सरकार के उन मंसूबों को उजागर किया जा सके जो धन उत्पादकों के पूरे वर्ग को मुनाफाखोरों का गुलाम बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच ने सरकार को एक एक कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि गहराते बेरोज़गारी संकट और बढ़ती महंगाई के बीच इन संहिताओं की अधिसूचना, मेहनतकश जनता के खिलाफ युद्ध की घोषणा से कम नहीं है। केंद्र सरकार अपने पूंजीवादी मित्रों के साथ मिलकर देश को मालिक-नौकर संबंधों के शोषणकारी युग में वापस ले जाने की कोशिश कर रही है जिसे कतई स्वीकार नहीं किया जाएगा।
केंद्रीय ट्रेड यूनियनों का मंच सरकार को गंभीर चेतावनी देता है कि भारत के कामकाजी लोग श्रम संहिताओं को वापस लिए जाने तक कड़ी लड़ाई लड़ेंगे।









