रायपुर:खमतराई बाजार चौक में चल रही श्रीमद्भागवत की दिव्य अमृतमयी कथा के कृष्ण जन्म को विस्तार देते हुए शंकराचार्य आश्रम के प्रभारी स्वामी डॉ.इन्दुभवानन्द तीर्थ महाराज ने कहा कि भगवान स्वयं सत्य स्वरूप हैं और उनके प्राप्ति का साधन भी सत्य है।उन्होंने कहा भगवान जब देवकी के गर्भ में आ गए तो देवताओं की मन में संदेह उत्पन्न हो गया। शास्त्रों में गर्भ की निंदा की गई है गर्भवास को महा दुःख माना गया है। समस्त देवता घबराए, कही भगवान गर्भ से लौट न जाए, आकर स्तुति करने लगे। देवताओं ने कहा आपका व्रत, आपकी प्रतिज्ञा सर्वथा सत्य रहती है। आपकी प्राप्ति का साधन भी सत्य है, आप तीनों कालों के सत्य हैं। अर्थात भूत, वर्तमान और भविष्य तीनों के आप साक्षी हैं। पांच भूतों के रूप में आप ही विराजमान है, और पांच भूतों के कारण भी है। आप संपूर्ण सृष्टि प्रकृति के अभिन्न निमित्तोपादान कारण के रूप में स्थित है।आप व्यवहारिक वा परमार्थिक सत्य के साथ-साथ लौकिक एवं वैदिक सत्य के भी स्वरूप है, अर्थात् आप सत्य के भी सत्य हैं। सत्य आपका स्वरूप है। इस प्रकार देवगण भगवान की शरणागति और प्रपत्ति दोनों स्वीकार करते हैं। शरणागति और प्रपत्ति दोनों में से किसी एक को स्वीकार करना चाहिए। जहां भक्त भगवान के चरण के तल के नीचे अपना हाथ रखता है और भगवान से प्रार्थना करता है कि आप इसे अपने चरण के नीचे दबा लीजिए जिससे हम आपसे दूर न भाग जाए वहां वह शरणागति कहलाती है, और जहां भक्त अपने हाथ से भगवान के प्रपद अर्थात चरण के ऊपरी भाग को पकड़ लेता है और प्रपन्न हो जाता है उसे प्रपत्ति कहते हैं।
स्वामी डॉ.इन्दुभवानन्द तीर्थ महाराज ने कहा कि शरणागति मार्जार(बिल्ली) सरीखी होती है और प्रपत्ति वानरी सरीखी होती है। बिल्ली बच्चों को पकड़ कर के संभालती है और वानरी मां को पकड़ करके अपने आप को संभाल लेती है। गंगा के प्रसंग में महाराज ने बताया कि गंगा मां साक्षात नारायण का ही स्वरूप मानी जाती है। नीराकार ब्रह्म के रूप में हम मां गंगा की उपासना करते हैं। लोक परलोक दोनों में हमारा कल्याण गंगा मां करती है, अतः गंगा की शुद्धि जल की शुद्धि है, जल की शुद्धि जीवन की शुद्धि है, जल की प्राप्ति जीवन की प्राप्ति है अतः जल शुद्ध रहे तो जीवन सुरक्षित रहेगा और जल बचेगा तो जीवन बचेगा का भी संदेश भागवत आसन्दी से महाराज ने दिया। सुधि वक्ता ने राम जन्म,वामन अवतार, समुद्र मंथन, गजेंद्र मोक्ष आदि प्रसंगों को सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया। कथा के पूर्व यजमान सुदर्शन साहू डुल्ली बाई साहू, गज्जू साहू, गोदावरी साहू मान बाई साहू, निरंजन साहू ,मेनका साहू तथा परिवार के अन्य श्रोताओं ने भागवत भगवान की पोथी की आरती कर व्यास पूजन किया तथा कर्मकांड भाग को शंकराचार्य आश्रम के वैदिक विद्वानों ने संपन्न करवाया।









