रायपुर:लगभग 25 वर्ष पूर्व छत्तीसगढ के बेमेतरा जिले के साहू परिवार के आमंत्रण तब के स्वामी जी आज के परमाराध्य परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर अनन्तश्रीविभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानंदः सरस्वती ‘१००८’ जी महाराज सलधा गांव आए थे । कथा हुई लोग जुडे बडे महाराज( ब्रह्मलीन शंकराचार्य भगवान) जी के साथ-साथ पूज्य वर्तमान शंकराचार्य भगवान से गांव वाले भी सदा-सदा के लिए जुड गए ।आज इस गाँव मे विश्व का सबसे ऐतिहासिक मन्दिर बन रहा जिसमें एक साथ सवालाख शिवलिंग विराजेंगे ।

आगामी शिवरात्रि को इस #सपाद_लक्षेश्वर_धाम मन्दिर का प्राण प्रतिष्ठा होना तय हुआ है ।
हर व्यक्ति अपने नाम , पूर्वज के नाम या वर्तमान के सभी पारिवारिक सदस्यों के नाम पर शिवलिंग की प्रतिष्ठा में भाग ले रहे हैं …. और भक्त का भगवान संग जुडाव इस कदर होगा की पूछिए मत …..
जैसे राम द्वारा स्थापित रामेश्वर महादेव हुए, भरत द्वारा स्थापित भरतेश्वर महादेव हुए वैसे ही जो शिवलिंग स्थापित कराने वाला भक्त है उसके नाम के आगे ईश्वर लगाकर उस मूर्ति को प्रतिष्ठा के बाद जाना जाएगा ।
जैसे – हमारा योगपट्ट ‘मुकुन्दानन्द’ तो हमारे भगवान का नाम मुकुन्दानन्द + ईश्वर = मुकुन्दानन्द के ईश्वर #मुकुन्दानन्देश्वर_महादेव स्थापित कराने वाले भक्तजन अपना या सम्बन्धितों का नाम लगा सकेंगे।
अब तक हमारे वरिष्ठ दण्डी स्वामी ज्योतिर्मयानन्द सरस्वती जी के प्रयास से कई हजार शिवभक्त इस अद्भुत और अद्वितीय कार्य में जुड चुके हैं , और निरंतर जुड भी रहे हैं ।विगत दिनों अपने छत्तीसगढ प्रवास के तीसरे दिन पूज्यपाद परमाराध्यचरण श्रीमज्जगद्गुरु शंकराचार्य भगवान सलधा गांव आए और चल रहे कार्य का निरीक्षण परीक्षण कर आगे के निर्देश दिए और वहीं गांव में शिवनाथ नदी के किनारे बनी कुटिया में रात्रि-विश्राम किया ।
इस मन्दिर की आधारशिला परमगुरु पूज्यपाद ब्रह्मलीन द्विपीठाधीश्वर श्रीमज्जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज जी ने रखी थी ।उनके आशीर्वाद से ये मन्दिर अपने आकार को धारण कर रहा है ।








