रायपुर:श्री शंकराचार्य आश्रम बोरिया कला में चल रहे चातुर्मास्य के क्रम को गति देने के लिए परमहंसी गंगा आश्रम से पधारे ज्योतिष्पीठाधीश्वर एवं द्वारका शारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य ब्रह्मलीन स्वामी श्री स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज के निजी सचिव तथा वर्तमान उभय पीठ सचिव एवं चातुर्मास स्वागत समिति के अध्यक्ष ब्रह्मचारी सुबुद्धानन्द जी महाराज ने उपस्थित समस्त भक्तों को उपदेश देते हुए बताया कि पराम्बा भगवती राजराजेश्वरी महा त्रिपुर सुंदरी की उपासना करने वाले साधकों को भोग और मोक्ष दोनों ही प्राप्त हो जाते है। मोक्ष मूलधन के रूप में और भोग ब्याज के रूप में प्राप्त हो जाता है। पराम्बा भगवती राजराजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी अपने श्री चरणों से जो दे देती हैं, वह वरद् हस्त दिखाकर देवता अपने हाथों से भी नहीं दे पाते है। भगवती राजराजेश्वरी की उपासना जो साधक करता है उसका दुबारा जन्म नहीं होता है और यदि जन्म होता है तो वह साक्षात स्वयं शंकर ही कहलाता है। उन्होंने कहा हमारे पूज्य गुरुदेव महाराज ब्रह्मलीन ज्योतिष्पीठाधीश्वर एवं द्वारका शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज ने छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में भगवती राजराजेश्वरी का स्फटिक मणिमय विग्रह की स्थापना भौतिक ऐश्वर्य की वृद्धि के साथ-साथ आध्यात्मिक उन्नति की मंगल कामना के साथ की थी। पूज्य महाराज चाहते थे कि छत्तीसगढ़ का भौतिक एवं आध्यात्मिक दोनों दृष्टि से विकास हो इस हेतु से उन्होंने स्फटिक मणिमय विग्रह यहां स्थापित किया है। राजराजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी अपने समस्त ऐश्वर्या के साथ यहां विराजमान यह मंदिर विश्व का प्रथम मंदिर है यहां पर स्फटिक मणि में भगवती विराजमान दूसरा कारण पूरे भारत में 64 योगिनी के मंदिर नहीं है यहां पर भगवती 64 योगिनियों के सहित विराजमान है। आप लोग भी माता राजराजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी का दर्शन करके अपना भौतिक एवं आध्यात्मिक मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं। डॉ इन्दुभवानन्द तीर्थ महाराज ने भगवती राजराजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी की ललिता सहस्रनाम के नाम की व्याख्या करते हुए बताया कि सहस्त्रनाम का पाठ राजराजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी को प्रसन्न करने के लिए सबसे सुंदर सरल व सुगम उपाय है नामस्मरण करने मात्र से भगवती राजराजेश्वरी प्रसन्न होकर अपने भक्तों को अभीष्ट फल प्रदान कर देती हैं। कथा के पूर्व पूज्य ब्रह्मचारी जी महाराज का शाल श्रीफल से स्वागत किया गया। स्वागत समारोह के कार्यक्रम में आचार्य धर्मेंद्र महाराज डी.पी. तिवारी एम एल पांडे, भूपेंद्र शर्मा, नरसिंह चंद्राकर, अनिल दुबे, महेंद्र वर्मा, पुहुपराम साहू, हीरा पांडे, भागीरथी पांडे,ज्ञानेश शर्मा, नंदकिशोर भोसले खिलावन साहू, भरत साहू, राधे, नंद किशोर देवांगन आदि गुरु भक्त उपस्थित थे।

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