
रायपुर:आज शरद पूर्णिमा पर दण्डी स्वामी “इन्दुभवान्द तीर्थ जी महाराज प्रकटोत्सव समारोह” का आयोजन किया गया है।
यह जानकारी देते हुए,आचार्य धर्मेंद्र महाराज ने कहा “इन्दुभवान्द तीर्थ जी महाराज के पावन प्रकटोत्सव समारोह” में आयोजित विभिन्न कार्यक्रम पराम्बा भगवती राजराजेश्वरी महात्रिपुर सुन्दरी ललिता प्रेमाम्बा महारानी का विशेष पूजन प्रातः काल 5:30 बजे प्रारंभ होगा।प्रातःकाल सिद्धेश्वर
महादेव का पूजन गणेश. हनुमान. भैरव. पूजन ,भगवती राजराजेश्वरी महात्रिपुर सुन्दरी ललिता प्रेमाम्बा महारानी का पूजन श्रंगार आरती सुबह 10:30 बजे, 11:15 ललिता सहस्त्र नाम परायण 11:30 चौंसठ योगिनी माताओं को मालपुआ भोग, अपराह्न 3:30 गौ पूजन हेतु श्री जगद्गुरु शंकराचार्य गौशाला हेतु प्रस्थान पश्चात 4:30 से 5:30 प्रवचन।
आचार्य धर्मेंद्र महाराज ने कहा शरद पूर्णिमा महामहोत्सव में सायंकालीन कार्यक्रम का शुभारंभ 6 बजे भजन संध्या से होगा। सायंकाल 7 बजे से भगवती राजराजेश्वरी महात्रिपुर सुन्दरी ललिता प्रेमाम्बा महारानी का पूजन, रात्रि 8 बजे दीपार्चन, रात्रि 9 तुला दान फल एवं अन्न, रात्रि 9:15 कत्थक नृत्य प्रस्तुति, रात्रि 9:30 महारास नृत्य प्रस्तुति होगी।उन्होंने कहा दण्डी स्वामी इन्दुभवानन्द तीर्थ जी महाराज के प्रकटोत्सव पर भक्तों के द्वारा अभिनन्दन किया जाएगा।
आचार्य धर्मेंद्र महाराज ने कहा दण्डी स्वामी “इन्दुभवान्द तीर्थ जी महाराज का जन्म आश्विन मास शुक्ल पक्ष पूर्णिमा को तदनुसार 29 नवंबर 1966 को शुभ दिन शुभ नक्षत्र सिद्ध योग में जबलपुर तहसील पाटन ( अब शहपुरा) के ग्राम सूखा भारतपुर में हुआ था।
बाल्यकाल का नामकरण “रेवा प्रसाद तिवारी ” ने विद्यालय की शिक्षा अपने गृह ग्राम सूखा भारतपुर मे ग्रहण उपरांत आगे के अध्ययन हेतु परमहंसी गंगा आश्रम में संचालित संस्कृत विद्यालय में प्रवेश किया। कुछ वर्षों अध्ययन के बाद विलक्षण बुद्धि और लगन बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में विख्यात विश्वविद्यालय श्री संपूर्णानंद विश्वविद्यालय से अपना आचार्य पर्यन्त अध्ययन किया। इसी समय आपने अनेक स्थानों पर अनेक विद्वानों के साथ न्याय, वेदान्त, सांख्य ,व्याकरण , मीमांसा, साहित्य, और अपने प्रिय विषय ज्योतिष का अध्ययन किया। और साथ ही पूज्य शंकराचार्य जी को अपने पूज्य गुरुदेव मानकर 1983 से सेवा में तत्पर रहने लगे।
दस महाविद्यायो में आपने षोडशी और बगलामुखी की साधना की और सुदृढ़ साधकों में सम्मिलित हुए। साथ ही आपने PhD उपाधि प्राप्त की।
काशी अध्ययन के उपरांत पूज्य गुरुदेव भगवान की आज्ञा से आप मध्यप्रदेश के जबलपुर में अपने अनेक शिष्यो को योग्य बनाया। जो आज अपने अपने क्षेत्र में प्रगति प्राप्त किये हुए हैं।। आपकी ईश्वर गुरु में निष्ठा अध्यात्म में निष्ठा होने के कारण वह समर्पण का शुभ दिन आया 2006 में परम पवित्र बसंत पंचमी के दिन श्रीमज्जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज के पावन सानिध्य में आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत धारण की दीक्षा प्राप्त की। और ब्रह्मचारी डां सच्चिदानन्द जी महाराज नामकरण हुआ। उन्हें
पूर्व मध्यप्रदेश और अब वर्तमान में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में श्री जगद्गुरु शंकराचार्य आश्रम बोरियाकला रायपुर के प्रभारी एवं मुख्य साधक की महती जिम्मेदारी दी गई। रायपुर आश्रम में पुनः नामकरण उपरांत ब्रह्मचारी डां इन्दूभवान्द जी महाराज का पूर्णाभिषेक हुआ तब से लेकर आज तक आप भगवती राजराजेश्वरी ललिता प्रेमाम्बा महारानी की अनन्य उपासना में निष्ठा एवं भक्ति से तत्पर है साथ ही विद्या प्रदान भी कराने हेतु विद्यार्थीयों को अध्ययन कराते हैं। गौ सेवा हेतु गौशाला आदि का संचालन कुशल रीति से निर्वाह करते हैं। आपकी साधना ,विद्या , ज्ञान, स्वभाव, प्रेम, से सभी अत्यंत लाभान्वित हो रहे हैं। आश्रम में समय समय पर कार्यक्रम आपके मार्गदर्शन में होतें है।। सभी गुरु परिवार आपके सानिध्य में मार्गदर्शन में भगवती राजराजेश्वरी ललिता प्रेमाम्बा महारानी एवं पूज्य गुरुदेव भगवान की साधना में लगे हुए है।
सन् 2025 में महाकुंभ में पुनः वह क्षण आया जब पश्चिमाम्नाय द्वारका शारदा पीठाधीश्वर श्रीमज्जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री सदानन्द सरस्वती जी महाराज ने अपने प्रथम दण्डी संन्यासी के रूप में उनको दण्ड दीक्षा प्रदान की एवं नाम हुआ परम पूज्य दण्डी स्वामी इन्दुभवानन्द तीर्थ जी महाराज। उनके प्रकटोत्सव पर राजधानी के भक्त जनों ने शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए भगवती राजराजेश्वरी ललिता प्रेमाम्बा महारानी एवं पूज्य गुरुदेव भगवान से प्रार्थना की है कि सानिध्य सभी को प्राप्त होता रहें।।








