
रायपुर: शंकराचार्य आश्रम बोरिया कला में चल रहे चतुर्मास प्रवचन माला के क्रम में शंकराचार्य आश्रम के प्रभारी डॉ. स्वामी इन्दुभवानन्द तीर्थ महाराज ने अपने नित्य श्रीमद्भागवत सत्संग पर प्रकाश डालते हुए बताया कि दान और सम्मान के द्वारा सभी का पूजन करना चाहिए।
उन्होंने कहा प्रकृति के समस्त जीव परमात्मा के ही पुत्र हैं, यही समझ करके सब का यथा योग्य सम्मान अवश्य करना चाहिए प्राणियों की उपेक्षा करके अथवा किसी प्राणी से शत्रुता रख करके भगवान को यदि प्रसन्न करना चाहोगे तो भगवान प्रसन्न नहीं हो सकते है, और आपको कभी शांति भी प्राप्त नहीं हो सकती अतः प्रकृति के समस्त जीवों से मित्रवत् व्यवहार करना ही शास्त्र की आज्ञा है जो लोग सांसारिक संपत्ति और ऐश्वर्य के अभिमान में मत्त रहते हैं।दीन दुखियों की सेवा नहीं करते हैं उनका जीवन ही सबसे अधिक कष्ट में रहता है मनुष्यों को अपनी संपत्ति में उतना ही अधिकार है जितने से उनका पेट भर जाए जो उससे अधिक अपना मानते हैं वह चोर हैं और दंड के पात्र हैं। गृहस्थों को विशेष ध्यान रखना चाहिए कि जैसा भोजन वे करते हैं, वैसे ही भोजन के अधिकारी समस्त जीव हैं। जैसे आपके शरीर पर पीड़ा होने पर उपचार के आप अधिकारी हैं वैसे ही अन्य जीवों के शरीर पर पीड़ा होने पर उनका उपचार आप पर आधारित है अतः उनके साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। प्रशंसनीय कार्य तो यह होना चाहिए कि अपने दुख को छोटा समझ करके संसार के प्राणियों के दुख को बड़ा समझना चाहिए।कथा के पूर्व समस्त यजमानों ने भागवत पुराण पोथी का पूजन कर आरती संपन्न की।








