रायपुर:वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद ने 3 सितंबर 2025 को अपनी 56वीं बैठक में व्यक्तिगत स्वास्थ्य और जीवन बीमा पॉलिसियों पर 18 प्रतिशत जीएसटी हटाने का निर्णय लिया। इस निर्णय की घोषणा करते हुए, वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने कहा कि 22 सितंबर 2025 से व्यक्तिगत जीवन और स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों पर जीएसटी 18 प्रतिशत समाप्त कर शून्य करने की घोषणा की । यह आल इंडिया इंश्योरेंस एम्प्लाइज एसोसिएशन के सदस्यों द्वारा देश भर में दो दशकों से भी अधिक समय से चलाए जा रहे अथक अभियान और जन-सहयोग की एक बड़ी जीत है। ए आई आई ई ए के राष्ट्रीय सहसचिव धर्मराज महापात्र ने रायपुर में इसके लिए आयोजित बीमा कर्मियों की आभार सभा को संबोधित करते हुए वास्थ्य और जीवन बीमा पर जीएसटी के भारी बोझ से आम आदमी को राहत दिलाने के लिए किए गए सराहनीय प्रयासों के लिए बधाई दी है।
उन्होंने इस अभियान की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि (AIIEA) की इकाइयों द्वारा चलाया गया अभियान अद्भुत था। विदित हो कि जीएसटी से पहले, जीवन बीमा प्रीमियम पर सेवा कर की अवधारणा पहली बार वित्तीय वर्ष 2004-05 से लागू की गई थी। बाद में इसे जीएसटी द्वारा प्रतिस्थापित कर दिया गया। (AIIEA) ने मई 2004 में पॉलिसी धारकों से लगभग 30 लाख हस्ताक्षर एकत्र करके इसके विरुद्ध अपना अभियान शुरू किया। (AIIEA) ने 29.05.2014 और 22.01.2016 को तत्कालीन वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली को पत्र लिखकर जीवन और स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर जीएसटी हटाने की मांग की। इसी दौरान, हमारी इकाइयों ने विभिन्न राजनीतिक दलों के 187 सांसदों से मुलाकात की और अपनी मांग पर उनका समर्थन मांगा। (AIIEA) की उत्तरी क्षेत्रीय इकाई ने जनवरी/फरवरी 2016 में लोकसभा के सभी 543 सांसदों और राज्यसभा के 240 सांसदों से मुलाकात की और बीमा पॉलिसियों पर कराधान के “EEE” (AIIEA) का नोट प्रस्तुत किया था । अगस्त 2017 में, देश भर में AIIEA की इकाइयों ने 45.23 लाख पॉलिसी धारकों से जीएसटी वापस लेने की मांग करते हुए हस्ताक्षर जुटाए और ये हस्ताक्षर 04.09.2017 को वित्त मंत्री को सौंपे गए थे । अभियान को आगे बढ़ाते हुए, AlIEA ने 22 मार्च 2019 को लगभग सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रमुखों को अपील पत्र भेजकर हमारी मांग पर उनका समर्थन मांगा। इसके बाद मार्च से मई 2019 के महीनों के दौरान सभी राजनीतिक स्पेक्ट्रम के सांसदों से मिलने और उनका समर्थन प्राप्त करने का अभियान चलाया गया; अभियान के दौरान हमारी इकाइयों ने 209 सांसदों से मुलाकात की। बाद के महीनों में देश भर में AIIEA इकाइयों द्वारा एक उत्साही अभियान देखा गया। AllEA ने केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण को 17.06.2019, 07.01.2021, 28.12.2023, 26.06.2024 को पत्र पत्र लिखा गया (AIIEA) की क्षेत्रीय इकाइयों ने जून 2019 में नीति आयोग की शासी परिषद के सभी सदस्यों को पत्र लिखकर उनसे हस्तक्षेप का अनुरोध किया । अप्रैल 2024 में सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रमुखों को फिर से पत्र लिखा और संसद में इस मुद्दे को उठाकर उनसे हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया। AIIEA की इकाइयों ने अप्रैल/मई 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव में सैकड़ों उम्मीदवारों से मिलने का एक अनूठा अभियान चलाया और उनसे अपने चुनावी घोषणापत्र में जीएसटी वापसी के मुद्दे को शामिल करने का अनुरोध किया। (AIIEA) ने विपक्ष के नेता को एक पत्र लिखा।
11.07.2024 को लोकसभा अध्यक्ष श्री राहुल गांधी को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर उनसे व्यक्तिगत हस्तक्षेप का अनुरोध किया; श्री गांधी ने पत्र का उत्तर दिया और हमारे आंदोलन को अपना समर्थन देने का आश्वासन दिया। केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी से भेंट की उन्होंने भी हमारे समर्थन में वित्त मंत्री को पत्र लिखा । (AllEA) ने इस अभियान को निरंतर जारी रखा।
जून-जुलाई 2024 के महीनों में चलाए गए अभियान की व्यापकता ऐसी थी कि इसे हमारे आंदोलन का सर्वोच्च शिखर कहा जा सकता है। हमारी इकाइयों ने प्रत्येक राजनीतिक दल के 400 से अधिक सांसदों से मुलाकात की और उन्हें समझाया कि जीवन और स्वास्थ्य प्रीमियम पर जीएसटी लगाने का वास्तव में जीवन की अनिश्चितताओं पर कर लगाना है।
भारतीय ट्रेड यूनियन आंदोलन के इतिहास में शायद किसी एक विचार पर इतनी बड़ी संख्या में सांसदों को संगठित नहीं किया गया होगा, तब जाकर जी एस टी कौंसिल ने इस पर विचार के लिए उप समिति बनाई। सभी राज्य के वित्त मंत्री से मिले ।संगठन ने देश के आम जनता को इसके लिए बधाई दी। इसके पूर्व निजीकरण के मुद्दे पर आम जनता से 1.5 करोड़ हस्ताक्षर जुटाकर ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करने के बाद AIIEA की यह एक और शानदार उपलब्धि है। AIIEA ने भारतीय समाज, विशेषकर उसके कमजोर वर्गों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के कारण यह अभियान चलाया। भारतीय संविधान अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के मौलिक अधिकार की गारंटी देता है। निस्संदेह, जीवन के अधिकार का अर्थ स्वास्थ्य का अधिकार भी है। सर्वोच्च न्यायालय के न्यायिक निर्णयों ने यह कहते हुए इस स्थिति को बरकरार रखा है कि सभी नागरिकों को पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएँ प्रदान करना सरकार का दायित्व है। लेकिन आज हम पाते हैं कि राज्य इस बुनियादी ज़िम्मेदारी को भूल गया है और स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण को और अधिक बढ़ावा दे रहा है। एक सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा प्रणाली बनाने के बजाय, यह आश्चर्यजनक है कि सरकार ने जीवन और स्वास्थ्य प्रीमियम पर कर लगाने का विकल्प चुना था। (AIIEA) ने इसी समझ के साथ यह अभियान चलाया ।
(AIIEA) के शानदार अभियान ने लोगों को व्यक्तिगत जीवन बीमा और स्वास्थ्य प्रीमियम में राहत प्रदान करने में सफलता प्राप्त की है।
श्री महापात्र ने कहा कि विनम्रतापूर्वक कहा जा सकता है कि AIIEA ने देशवासियों को कुछ राहत प्रदान करके उनकी बहुत बड़ी सेवा की है। लेकिन हमें यह स्वीकार करना होगा कि यह पर्याप्त नहीं है। स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण के विरुद्ध और राज्य द्वारा एक सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा प्रणाली स्थापित करने के लिए हमारे संघर्ष जारी रहेंगे।







