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रायपुर: शंकराचार्य आश्रम बोरिया कला रायपुर में चल रहे चातुर्मास प्रवचन माला के क्रम को गति देते हुए शंकराचार्य आश्रम के प्रभारी डॉ. स्वामी इन्दुभवानन्द तीर्थ महाराज ने शिव पुराण की कथा के अंतर्गत गणेश जन्म पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रबल बुद्धि का साम्राज्य कुतर्क को दबा देता है। यही कारण है कि भगवान श्री गणेश चूहे पर सवारी करते हैं उनका मूषक वाहन है। मूषक का स्वभाव होता है कि प्रत्येक वस्तु को वह काट देता है। वह यह नहीं देखता है, कि वस्तु नयी है अथवा पुरानी है, बिना कारण ही उन्हें काटना मूषक का स्वभाव होता है। इसी प्रकार कुतर्की जन भी यह नहीं सोचते हैं कि प्रसंग कितना सुंदर व गंभीर है एवं लोगों के हितकर है। उन्होंने कहा वे स्वभाववस चूहे की भांति उसे काट डालने की चेष्टा करेंगे। बुद्धि का साम्राज्य आते ही कुतर्क अपने आप दब जाता है इसलिए श्री गणपति बुद्धि के देवता हैं अतः उन्होंने कुतर्क रूपी मूषक को अपना वाहन बनाया और कुतर्क को नीचे दबा करके रखा है। इस प्रकार हमें गणपति के प्रत्येक श्री अंग से सुंदर शिक्षा मिलती है भगवान गणेश जी को दूर्बा बहुत ही प्रिय है दूर्बा नम्रता, सरलता और सदाबहार की प्रतीक है। श्री गणपति की आराधना करने वाले भक्तजनों की कुल की वृद्धि दूर्वा के द्वारा ही होती है अतः दूर्बा चढ़ाने से कुल की वृद्धि और कुल के दोष भी निकलते है। जिनको संतान नहीं होती है, या विलंबित होती है, या किसी कारण या दोष के वजह से संतान में दोष आजाता है, तो उसकी मुक्ति के लिए गणेश भगवान को दूर्वा भी अवश्य चढ़ाना चाहिए।आज की कथा के पूर्व शंकराचार्य आश्रम के वैदिक विद्वानों ने पोथी का पूजन कर आरती की तथा जगतगुरु कुलम् के छात्रों ने वैदिक पाठ संपन्न किया।










