
बिलासपुर: बिना मान्यता के प्रदेश में चल रहे नर्सरी स्कूलों के मामले में कांग्रेस नेता विकास तिवारी की याचिका पर आज सुनवाई हुई। इस मामले में शिक्षा विभाग के सचिव के छुट्टी पर होने के चलते संयुक्त सचिव द्वारा पेश शपथ पत्र में कहा गया था की नर्सरी सलाह को मान्यता देने के लिए शिक्षा विभाग में कोई प्रावधान नहीं है। जिस पर भड़के चीफ जस्टिस ने कहा कि पान दुकान वाले भी बिना मान्यता की नर्सरी स्कूल चला सकते हैं। आप लोग बड़े स्कूल वालों को बचाने के लिए कमेटी बनाते हैं और दो दिनों में शपथ पत्र दे देते हैं। आप लोगों ने जो भी प्रावधानों में बदलाव किए हैं वह तो आगे की तारीख से लागू होंगे। पर 2013 से चल रहे नर्सरी स्कूलों को मान्यता लेने का प्रावधान है। पर मानता नहीं ली गई जिसके लिए बच्चों को 5 लाख रुपए मुआवजा दिलवाएं और बिना मान्यता वाले स्कूलों पर कार्यवाही करें। यह क्राइम हैं।
बिना मान्यता के नर्सरी स्कूल चलाए जाने और एक ही स्कूल के नाम से मान्यता लेकर मिलते जुलते नामों से अलग-अलग ब्रांच खोलकर बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले और लाखों रुपए वसूलने वाले स्कूलों के खिलाफ रायपुर निवासी कांग्रेस नेता विकास तिवारी ने हाईकोर्ट मे याचिका लगाई थी। इस मामले में उन्होंने बताया था कि ऐसे स्कूलों की शिकायत करने पर उनके खिलाफ झूठी एफआईआर दर्ज करवा दी गई। पिछली सुनवाई में शिक्षा सचिव के शपथ पत्र को अदालत में झूठा पाया था। शिक्षा सचिव ने शपथ पत्र में बताया था कि नर्सरी स्कूलों को मान्यता की जरूरत नहीं होती। जिस पर याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने नियमों को दिखाते हुए बताया था कि सन 2013 से नर्सरी स्कूलों में मान्यता लेने का अधिनियम है। जिस पर हाई कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए शिक्षा सचिव से दूसरा शपथ पत्र मांगा था।
आज मामले की सुनवाई हाई कोर्ट में चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की डिवीजन बेंच में हुई। शिक्षा सचिव की छुट्टी में रहने के चलते संयुक्त सचिव ने शपथ पत्र पेश कर बताया कि पास सदस्य कमेटी के रिपोर्ट के आधार पर 2013 में नर्सरी शालाओं के मान्यता लेने वाले अधिनियम को रद्द किए जाने का प्रस्ताव है। इस शपथ पत्र पर चीफ जस्टिस भड़क गए। उन्होंने कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि जो भी आप लोग बदलाव करेंगे वह बदलाव की तिथि के बाद से लागू होगा ना कि पहले से 2013 से तो नर्सरी स्कूलों के लिये भी मान्यता लेने का प्रावधान था पर स्कूलों ने 12 साल बिना मान्यता के स्कूल चला लिया। यह क्या मजाक है कि पहले आपने खुद नियम बनाया की नर्सरी से लेकर ऊपर की कक्षाओं के लिए अनुमति लेने का प्रावधान है और जब कहीं फस गए तो कह रहे हैं कि नर्सरी के लिए अनुमति की जरूरत नहीं पड़ती।
चीफ जस्टिस ने कहा कि 2013 से अनुमति का नियम है जब हमने संज्ञान लिया और सुनवाई शुरू की तब आपको ध्यान आया। 25 जुलाई को कमेटी बनी और दो दिनों में रिपोर्ट भी आ गई,वो भी 2013 का । चीफ जस्टिस ने सरकार की तरफ से खड़े वकील से नाराजगी जताते हुए कहा कि आप लोगों का विजन क्लियर नहीं है आप लोग क्या पॉलिसी बनाते हैं क्या नोटिफिकेशन होता है इससे जनता को और राज्य को क्या फायदा होगा कुछ भी आप लोगों को क्लियर नहीं है। गया दिन सुनवाई में पूछा क्या कि नर्सरी स्कूलों के लिए मान्यता की जरूरत है या नहीं है तो आप पकड़े गए और आपने कह दिया कि इसके लिए जरूरत नहीं है। 2013 से मान्यता की जरूरत है पर 12सालों तक बिना मान्यता के स्कूल चला लिए गए फीस ले लिए गए। और जब पकड़े गए तो आप लोग कहते हैं कि मान्यता की जरूरत नहीं है। मैं आप लोगों की प्रॉब्लम समझ रहा हूं, जब आपने देखा कि यह बड़े लोग है और नियमों के पालन करने पर 12 साल बिना मान्यता के स्कूल चलाने पर इनका स्कूल बंद हो जाएगा,इनको मुआवजा देना होगा, क्रिमिनल केस बनेगा तब आपको लगता है कि इनको बचाना पड़ेगा और आपने कह दिया की मान्यता की जरूरत नहीं है।
चीफ जस्टिस ने कहा विभाग द्वारा आम नियम बना देते हैं कि नर्सरी स्कूलों के लिए मान्यता की जरूरत नहीं है तो उससे हमें मतलब नहीं है वह आगे लागू होगा ना कि पीछे के वर्षों के लिए। जिन्होंने बिना मान्यता के 12 साल स्कूल चलाई है उन्होंने बच्चों के साथ फ्रॉड किया है पेरेंट्स के साथ फ्रॉड किया है,उसके खिलाफ कार्यवाही करिए और हमें बताइए। 28 जुलाई 2025 को आपकी रिपोर्ट आई उसके बाद नर्सरी स्कूलों के लिए मान्यता लेने का प्रावधान नहीं होगा यह आप लागू कर सकते हैं पर इससे पहले 2013 से मान्यता लेने का प्रावधान था और बिना मान्यता लिए स्कूल चलाने वालों ने अपराध तो किया है, हम बच्चों के भविष्य के साथ नहीं खेल सकते बच्चों को 5-5 लख रुपए मुआवजा दिलवाएं और दूसरे स्कूलों में शिफ्ट कीजिए। गली मोहल्ले में स्कूल खोलकर पैसे कमाए गए और मालिक खुद मर्सिडीज़ गाड़ियों में घूम रहे हैं। बच्चों को मुआवजा दिलवाई है तो उनके द्वारा कमाया गया सारा पैसा निकल जाएगा। आज आपको पॉलिसी में यह अमेंडमेंट मर्सिडीज़ में घूमने वाले प्राइवेट स्कूलवालों के लिए करना पड़ रहा है पर इसे पूर्व की तिथि से लागू नहीं किया जा सकता।
चीफ जस्टिस ने कहा कि छत्तीसगढ़ एक विकास शील राज्य है और यही शिक्षा विभाग के अधिकारियों के लापरवाही के करण नर्सरी स्कूलों में गरीब छात्रों को निशुल्क शिक्षा का अधिकार नहीं मिल रहा है, बेहद दुखद है और इसमें संवेदनशीलता की जरूरत है। रोज नए स्कैम हो रहे हैं, रोज सुबह उठों तो एक नया स्कैम देखने को मिलता है। ऐसा ही चलेगा तो क्या हम लोग करेंगे।
मामले में चीफ जस्टिस ने 13 अगस्त को शिक्षा सचिव को नया शपथ पत्र देने के निर्देश दिए। जब उन्हें पता चला कि शिक्षा सचिव छुट्टी में है तो उन्होंने पूछा कि कब तक शिक्षा सचिव छुट्टी से आ जाएंगे? सरकारी वकील ने उन्हें बताया कि 15 दिन की छुट्टी में होने की जानकारी है, एक्जेक्ट तिथि उन्हें नहीं पता। तब चीफ जस्टिस ने कहा कि उन्हें एग्जेक्ट डेट चाहिए, शिक्षा सचिव तो हमारे डर से 15 दिन की छुट्टी क्या छुट्टी आगे बढ़कर 30 दिन की छुट्टी में चले जाएंगे, वह परेशान हो गए हैं हमसे क्योंकि उनसे भी बहुत कुछ संभाले नहीं संभाल रहा है। सरकारी वकील ने बताया कि उनकी जगह संयुक्त सचिव शपथ पत्र पेश कर देंगे वह भी आईएएस हैं। जिस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि इतने संवेदनशील मुद्दे को टाला नहीं जा सकता यदि सचिव साहब छुट्टी से आ जाए तो उनके शपथ पत्र 13 को पेश करवाइए अन्यथा जॉइंट सेक्रेटरी का ही पेश करवा दीजिएगा। मामले की अगली सुनवाई 13 अगस्त को रखी गई है।






