रायपुर: शंकराचार्य आश्रम बोरिया कला रायपुर में चल रही चातुर्मास प्रवचन माला के क्रम को गति देते हुए शिव पुराण की कथा की व्याख्या करते हुए शंकराचार्य आश्रम की प्रभारी डॉ. स्वामी इन्दुभवानन्द तीर्थ महाराज ने बताया कि प्रत्येक प्राणी जन्म से ही ऋणी होता है।
उन्होंने कहा धर्म शास्त्रों के अनुसार प्रत्येक प्राणी को तीन ऋणों से उऋण होना पड़ता है, एक देव ऋण, ऋषिऋण, और पितृऋण। इन तीन ऋणों से ऊऋण होकर के व्यक्ति अपने कल्याण की बात सोच सकता है। ब्रह्मचर्य व्रत पालनपूर्वक वेद शास्त्रों का अध्ययन अध्यायन शिक्षा का प्रचार प्रसार और शिक्षा से संबंधित कार्य करने से व्यक्ति ऋषिऋण से मुक्त हो जाता है क्योंकि ऋषि ज्ञान के अधिष्ठाता है। अतःऋषिऋण से मुक्त होने के लिए ज्ञान का प्रचार प्रसार आवश्यक है देवताओं के पूजन पाठ करने से तथा नित्य एवं नैमित्तिक कर्म करने से व्यक्ति देवऋण से मुक्त हो जाता है, जब तक वह नित्य नैमित्तिककर्म पूजन पाठ नहीं करता है तब तक देवताओं का ऋण उस पर चढा रहता है। अतः उससे मुक्त होने के लिए समय-समय पर देवताओं की पूजा उपासना करते रहना चाहिए।
डॉ. स्वामी इन्दुभवानन्द तीर्थ महाराज ने कहा पितृऋण से मुक्त होने के लिए श्राद्ध तर्पण एवं पिंडदान करना अत्यंत आवश्यक है जब तक व्यक्ति श्राद्ध तर्पण पिण्डदान नहीं करता है तब तक वह है पितृ ऋण से मुक्त नहीं हो पाता है, और पितृ ऋण के मुक्त न होने से जीवन में विभिन्न प्रकार की बाधाएं उपस्थित हो जाती हैं अतः अपने जीवन को सुखी और समृद्ध यदि बनाना है तो पितरों के निमित्त श्राद्ध तर्पण एवं पिंडदान अवश्य करना चाहिए।
कथा प्रसंग में स्वामी जी ने कहा कि नारद जी ने जब दक्ष के पुत्रों को विरक्त होने का उपदेश दिया तो दक्ष ने कुपित होकर नारद जी को श्राप देते हुए कहा कि पितृऋण से मुक्त हुए बिना कोई मुक्ति के मार्ग का पथिक नहीं बन सकता है। आश्रम से आश्रम की ओर जाना ही सनातन धर्म की परंपरा है अभी इन्होंने ब्रह्मचर्य आश्रम ग्रहण किया है इसके पश्चात गृहस्थ आश्रम फिर वान्यप्रस्थ तत्पश्चात सन्यास आश्रम में जाने की योग्यता रखते हैं। तुमने यह उचित नहीं किया इसलिए तुम साप के अधिकारी हो, ऐसा कहते हुए नारद जी को दक्ष ने साप दे दिया।कथा के पूर्व शंकराचार्य आश्रम के वैदिक विद्वानों एवं यजमान पुहुपराम साहू श्री मति मनोरमा साहू युवराज साहू नरेश साहू देवेन्द्र साहू एवं सपरिवार भगवान का शिव का पूजन एवं आरती की।








