रायपुर: देश की 10 प्रमुख केंद्रीय ट्रेड यूनियनों व स्वतंत्र फेडरेशनों के संयुक्त मंच द्वारा श्रम कानूनों में बदलावों, निजीकरण व अन्य मुद्दों पर जारी संघर्ष के क्रम में आज देश भर में विरोध दिवस मनाया गया l छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के बीमा कर्मियों के अलवा अन्य श्रमिक संगठनों ने प्रदर्शन आयोजित किए । रायपुर डिवीजन इंश्योरेंस एम्पलाइज यूनियन द्वारा इस अवसर पर एल आई सी के रायपुर मंडल कार्यालय सहित समस्त 16 शाखा कार्यालयों के समक्ष भोजनावकाश के दौरान प्रदर्शन कर सभाएं ली गई । इसके माध्यम से केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित बीमा संशोधन अधिनियम का विरोध करते हुए एल आई सी में तृतीय व चतुर्थ संवर्ग में तत्काल नई भर्ती करने व बीमा प्रीमियमों से जी एस टी हटाए जाने की मांग पर 9 जुलाई की हड़ताल को पुरजोर रूप से सफल बनाने का आव्हान किया गया ।
इस क्रम में एल आई सी मंडल कार्यालय पर आयोजित प्रदर्शन को संबोधित करते हुए सेंट्रल जोन इंश्योरेंस एम्पलाइज एसोसिएशन के महासचिव काम. धर्मराज महापात्र ने कहा कि पूर्व में यह हड़ताल आज 20 मई को होनेवाली थी लेकिन युद्ध के माहौल में इसे 9 जुलाई हेतु बढ़ा दिया गया है ।उन्होंने कहा कि एल आई सी के शेयरों को पुनः विनियोजित किये जाने के कदमों का हम कड़ा विरोध करते है ।इसी प्रकार प्रस्तावित बीमा संशोधन अधिनियम के माध्यम से कंपोजिट लाईसेंस जैसे कदम राष्ट्रीयकृत बीमा उद्योग हेतु विनाशकारी साबित होंगे । काम. महापात्र ने राष्ट्रीयकृत बीमा उद्योग में बढ़ते व्यवसाय और निरंतर जारी सेवानिवृत्तियों के मद्देनजर तत्काल तृतीय व चतुर्थ संवर्ग में नई भर्ती की मांग की । उन्होंने कहा कि कर्मचारियों पर कार्य का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है । उन्होंने बीमा कर्मचारियों सहित समस्त कर्मचारियों व श्रमिकों से आव्हान किया कि 26000 रुपया न्यूनतम वेतन, सरकारी क्षेत्रों में नई भर्ती आरम्भ करने, ठेकाकरण व आउट सोर्सिंग पर रोक लगाने, समान कार्य का समान वेतन प्रदान करने, अंधाधुंध निजीकरण रोकने, चारों श्रम संहिताओं को तुरंत निरस्त करने, नई पेंशन योजना समाप्त कर पुरानी पेंशन बहाल करने, महंगाई पर रोक लगाने, किसानों को उनकी फसल का सही मूल्य प्रदान करने, बीमा प्रीमियमों से जी एस टी वापस लेने जैसे मुद्दों पर आयोजित होनेवाली राष्ट्रव्यापी हड़ताल में शामिल हो ।इस द्वार प्रदर्शन को रायपुर डिवीजन इंश्योरेंस एम्पलाइज यूनियन के महासचिव का. सुरेंद्र शर्मा ने संबोधित करते हुए कहा कि चार श्रम संहिताओं को थोपे जाने का अर्थ देश के श्रमिकों के सारे अधिकार समाप्त कर उनको ग़ुलामी की जिंदगी में धकेलना है l इन श्रम संहिताओं को लागू कर देने से श्रमिकों वेतन, पेंशन, बोनस, अवकाश, काम के निर्धारित घंटे, चिकित्सा लाभ जैसे परिभाषित अधिकार समाप्त हो जाएंगे एवं श्रमिकों को पूर्णतः मालिकों की दया पर छोड़ दिया जाएगा । देश भर में इन सुधारों का तीखा विरोध जारी है ।सभा की अध्यक्षता संगठन के अध्यक्ष का. राजेश पराते द्वारा की गई ।








