
दिल्ली:भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ सुधांशु त्रिवेदी ने कहा पाकिस्तानी सेना के प्रमुख द्वारा भारत के विभाजन पर दिया गया बयान साफ़ करता है कि दो राष्ट्र का सिद्धांत जिन्ना ने दिया यही पाकिस्तान का आधार बना। अब वीर सावरकर पर आरोप लगाने वालों को माफ़ी माँगना चाहिए।यानि मुजरिम ने इकबालिया बयान दे दिया फिर भी मुद्दई बेशर्मी के साथ बाज़ नहीं आ रहा है ।उन्होंने कहा इससे भी अधिक गंभीर बात जो हर भारतीय को समझना चाहिए कि नफ़रत का कितना गहरा षड्यंत्र भारत आज़ादी/ विभाजन के समय से इस देश में पनपाया जा रहा है । इसका पूरा स्वरूप समझिए ।
• पाकिस्तान में भारत के विरुध्द नफ़रत
• बांग्लादेश में भारत के विरुध्द नफ़रत
• भारत में भारत के विरुध्द नफ़रत
(टुकड़े-टुकड़े गैंग) को प्रोत्साहन
• कश्मीर में भारत के विरुध्द नफ़रत पैदा करना और प्रोत्साहन देना।
• कट्टरपंथी मुस्लिमों में भारत और हिन्दुओं के विरुध्द नफ़रत पैदा करना
• मिशनरियों में भारत और हिन्दुओं के विरुद्ध नफ़रत पैदा करना।
• भारत की धरती पर ही प्रारम्भ हुए सभी धर्मों हिन्दू सिक्ख बौद्ध इत्यादि एक ही परिवार के भाईयों में भी आपस में नफ़रत पैदा करना
• दक्षिण भारत में उत्तर भारत के विरुद्ध नफ़रत पैदा करने का प्रयास करना।
• राज्यों में एक दूसरे के विरुद्ध नफ़रत फैलाने का प्रयास जैसे तेलंगाना तमिलनाडु महाराष्ट और अनेक राज्यों में उत्तर भारतीयों विशेष UP और बिहारियों के विरुद्ध नफ़रत पैदा करना
• तमिल मराठी हिन्दी आदि को लेकर भारतीय भाषाओं में एक दूसरे के विरुद्ध नफ़रत पैदा करना।
• हिन्दू समाज में एक वर्ग में दूसरे वर्ग के लिए नफ़रत पैदा करना।
• हिन्दू समाज में एक जाति में दूसरी जाति के लिए नफ़रत पैदा करना
• पाठ्यपुस्तकों और मनगढ़ंत इतिहास के द्वारा हिन्दू धर्म और भारतीय संस्कृति के विरुद्ध नफ़रत पैदा करना।
राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा सोचिए जिनके गोदाम में इतने साल से नफ़रती सामान भरे पड़े हैं और नफ़रती सामान के कारख़ाने चल रहे हैं वो मोहब्बत की दुकान का बोर्ड लगाकर भारत को भरमाने चलें हैं।पाकिस्तान के आर्मी चीफ़ का बयान और भारत में पाकिस्तान के आर्मी चीफ़ को गले लगाने वाले और भारत के आर्मी चीफ़ को सड़क छाप गुंडा बताने वाले सेकुलरिस्टों के अरमान दो बदन एक जान की तरह हैं ।इसके बाद भी इनके मंसूबे सफल नहीं हुए क्योंकि भारतीय संस्कृति और हिन्दू संस्कृति के नहान स्वरूप के कारण भारत की एकता की जड़ें बहुत गहरी थी । सीमा के इस पार और सीमा के उस पार दोनों तरफ़ से इन्हीं जड़ों को खोखला करने का प्रयास किया जा रहा है, इसको समझने की आवश्यकता है








