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साहित्यिक पत्रकारिता को देश के नक्शे में लाने का काम छत्तीसगढ़ ने किया – गिरिजाशंकर

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रायपुर: पं माधवराव सप्रे जयंती पर आज छत्तीसगढ़ साहित्य एवं संस्कृति संस्थान, महाराष्ट्र मंडल और छत्तीसगढ़ मित्र के संयुक्त आयोजन में सप्रे सम्मान से सम्मानित होकर वरिष्ठ पत्रकार श्री गिरिजाशंकर ने कहा कि साहित्यिक पत्रकारिता की शुरुआत छत्तीसगढ़ से हुई और इसका श्रेय पं माधवराव सप्रे को जाता है।

समारोह की अध्यक्षता डॉ सुशील त्रिवेदी ने की।मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार और रंग आलोचक श्री गिरिजाशंकर ने कहा कि साहित्यिक पत्रकारिता के जनक थे। साहित्यिक पत्रकारिता एक अलग विधा के रूप में सन 1900 से हुई। द्विवेदी और भारतेंदु काल में संपादक प्रकाशक की भूमिका भी निभाता था। मराठी भाषी होने के बाद भी वे हिंदी और हिंदी प्रदेश के लिए समर्पित रहे। छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय नक्शे पर लाने में उनकी बड़ी भूमिका रही। अनेक विधाओं के माध्यम से सप्रे जी ने हिंदी साहित्य को समृद्ध किया। साहित्यिक पत्रिका समाज को दिशा निर्देश दिया। वरिष्ठ पत्रकार  सुभाष मिश्रा ने कहा कि आज की पत्रकारिता पर पूंजी का दबाव है। आज की वैकल्पिक मीडिया का दुरूपयोग भी हो रहा है। समारोह के अध्यक्ष डॉ सुशील त्रिवेदी ने कहा कि आजादी के आंदोलन का प्रथम उद्देश्य देश को बदलने का अभियान था। नवजागरण से साहित्यिक पत्रकारिता का जन्म हुआ। इसने नवबोध लाया।छत्तीसगढ़ मित्र ने 1900 के आरंभ को इस परिवर्तन के लिए चुना। छत्तीसगढ़ के पेंड्रा ने यह ज़िम्मेदारी ली।समारोह में डा चित्तरंजन कर, प्रो अनिल कालेले, समीर दीवान, डा रामकुमार बेहार, अशोक तिवारी, विनय शर्मा, वीरेंद्र पांडेय, सुरेश मिश्रा, जागेश्वर प्रसाद, उधो साहू, राजेन्द्र ओझा, मृणालिका ओझा, हरीश कोटक, रमेश अनुपम, आदि उपस्थित थे। अंत में महाराष्ट्र मंडल के पदाधिकारी और पत्रकार रवींद्र ठेंगड़ी ने आभार प्रकट किया।

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