रायपुर:

‘‘मां ने मुझे जन्म दिया, पिता ने अभयदान, उनके प्यार दुलार को सुनने कका, तुमने मुझको दिया जीवनदान‘‘ इन भावुकतापूर्ण शब्दों से ज़ाहिर होती भावनाएं उस आठ साल की बिटिया वर्षा की हैं, जिसने श्रवण बाधित होने की वजह से जन्म से कभी अपनी मां की आवाज़ ही नहीं सुनी थी। मगर अब नन्हीं वर्षा के जीवन मे खामोशी नहीं स्वर गूंज रहे हैं।






